नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग में करोड़ों रुपये की शासकीय जमीन में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने के आरोप में नायब तहसीलदार, पटवारी, बाबू और रीडर समेत सात लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
जांच में खुला बड़ा फर्जीवाड़ा
कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ द्वारा कराई गई जांच में सामने आया कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने रिकॉर्ड में कूटरचना, हेरफेर और दस्तावेज नष्ट करने जैसे गंभीर अपराध किए। इसके बाद तहसीलदार के आवेदन पर दिनारा थाने में मामला दर्ज किया गया।
इन पर दर्ज हुआ केस
एफआईआर में नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव, पटवारी बृजेश यादव, बाबू लोकेन्द्र श्रीवास्तव, रिकॉर्ड रूम प्रभारी प्रताप पुरी, बाबू जीवनलाल तिवारी, लालाराम वर्मा और पटवारी मुकेश चौधरी को आरोपी बनाया गया है। इनमें से दो की मौत हो चुकी है और एक आरोपी सेवानिवृत्त हो चुका है।
1980 से शुरू हुआ खेल
जांच में सामने आया कि वर्ष 1980-81 में दर्ज शासकीय सर्वे नंबर 101 और 247 में 1989-90 से ही हेरफेर शुरू कर दी गई थी। इसके बाद वर्षों तक जमीन की खरीद-फरोख्त होती रही। रिकॉर्ड में पेज फाड़ना, सर्वे नंबर बदलना और बिना अनुमति बदलाव करना जैसे कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
फर्जी पट्टे और रिकॉर्ड गायब
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ सर्वे नंबरों पर फर्जी और काल्पनिक पट्टे जारी किए गए, जिनका कोई रिकॉर्ड सरकारी दायरा पंजी में नहीं मिला। संबंधित फाइलें भी गायब पाई गईं, जिससे पूरे मामले में संगठित फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस चौकी का सर्वे नंबर भी गायब
हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड में हेरफेर के दौरान आरोपियों ने गांव में स्थित पुलिस चौकी का सर्वे नंबर तक डिलीट कर दिया। यह प्रशासनिक लापरवाही और गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
शिकायत से खुला मामला
मामला तब उजागर हुआ जब जमीन की खरीद-बिक्री के बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर उसे विक्रय से वर्जित दिखा दिया गया। इसके बाद शिकायत कलेक्टर तक पहुंची और जांच में पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया।
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