
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन । अयोध्या ने राम मंदिर के जरिए धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय लिखा, काशी ने कारिडोर के जरिए विश्वस्तरीय पहचान बनाई और अब उज्जैन देश की ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमी’ का नया मॉडल बनने की ओर बढ़ रहा है।
यहां सिंहस्थ-2028 सिर्फ 30 दिन का मेला नहीं, बल्कि अगले कई दशकों की अर्थव्यवस्था की बुनियाद बन रहा है। केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार की 18 हजार करोड़ की विकास योजनाएं धार्मिक आस्था को सड़क, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, जल प्रबंधन और रोजगार से जोड़ रही हैं। लक्ष्य केवल 40 करोड़ श्रद्धालुओं को सुविधा देना नहीं, बल्कि ऐसा शहर बनाना है, जिसकी अर्थव्यवस्था सिंहस्थ के बाद भी लगातार बढ़ती रहे।
महाकाल महालोक बनने के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई। इसके साथ होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, ई-रिक्शा, फूल, प्रसाद, हस्तशिल्प, ट्रैवल एजेंसियां और स्थानीय व्यापार का दायरा भी तेजी से बढ़ा। अब सिंहस्थ-2028 की तैयारियां इस बदलाव को स्थायी आर्थिक ढांचे में बदलने की कोशिश हैं।
यही वजह है कि इस बार निवेश केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर और उसके आसपास का इंफ्रास्ट्रक्चर एक साथ विकसित किया जा रहा है। सरकार ने सिंहस्थ के लिए 129 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें 778 करोड़ रुपये से 29 किलोमीटर नए घाट, 853 करोड़ रुपये से 22 नए पुल, 445 करोड़ रुपये की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल प्रदाय योजना, 438 करोड़ रुपये का सीवरेज नेटवर्क विस्तार, 284 करोड़ रुपये का यूनिटी माल, 645 करोड़ रुपये का इंटीग्रेटेड टेंपल इकोसिस्टम, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, मेडिकल डिवाइस पार्क, विक्रम उद्योगपुरी एवं मेडिकल डिवाइस पार्क में औद्योगिक निवेश, बहुस्तरीय पार्किंग, नई फोरलेन सड़कें, रेलवे ओवरब्रिज, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और डिजिटल श्रद्धालु सुविधाएं शामिल हैं।
इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी परिसंपत्तियां तैयार कर रही है। पहले सिंहस्थ में करोड़ों रुपये अस्थायी सड़क, शिविर और व्यवस्थाओं पर खर्च होते थे, जिनका उपयोग आयोजन के बाद सीमित रह जाता था। अब बनने वाले पुल, सड़कें, अस्पताल, जल परियोजनाएं, सीवरेज नेटवर्क और सार्वजनिक सुविधाएं आने वाले दशकों तक शहरवासियों और पर्यटकों दोनों के काम आएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो उज्जैन देश का पहला ऐसा धार्मिक शहर होगा, जहां आस्था ही अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इंजन बनेगी। इसका असर सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि होटल उद्योग, परिवहन, रियल एस्टेट, शिक्षा, स्वास्थ्य, छोटे व्यापार, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र तक दिखाई देगा। यही कारण है कि सिंहस्थ-2028 को अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मध्य भारत की सबसे बड़ी आर्थिक परिवर्तन योजना के रूप में देखा जा रहा है।
परियोजना लागत