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उज्जैन में शिप्रा आरती पर छिड़ी रार, तीर्थ पुरोहितों व महाकाल मंदिर समिति आमने-सामने, विवाद में उतरी पुलिस-प्रशासन की टीम

यह रार मंदिर समिति द्वारा श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान के 21 बटुकों से शिप्रा आरती कराने से शुरू हुई है। प्रशासन ने दूसरे दिन शनिवार...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 09:21:29 PM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 09:21:29 PM (IST)
उज्जैन में शिप्रा आरती पर छिड़ी रार, तीर्थ पुरोहितों व महाकाल मंदिर समिति आमने-सामने, विवाद में उतरी पुलिस-प्रशासन की टीम
शिप्रा तट पर प्रशासनिक बनाम पारंपरिक टकराव।

HighLights

  1. बटुकों की आरती पर तीर्थ पुरोहितों को आपत्ति
  2. शिप्रा तट पर प्रशासनिक बनाम पारंपरिक टकराव
  3. आरती विवाद में उतरी पुलिस-प्रशासन की टीम

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। तीर्थ नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी की आरती को लेकर तीर्थ पुरोहितों और महाकाल मंदिर समिति के बीच रार हो गई है। यह रार मंदिर समिति द्वारा श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान के 21 बटुकों से शिप्रा आरती कराने से शुरू हुई है। प्रशासन ने दूसरे दिन शनिवार को भी बटुकों से आरती कराई।

समिति ने कहा- यह पूरा आयोजन निशुल्क होगा

तीर्थ पुरोहित इस पर आपत्ति कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिप्रा नदी के तट पर तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान पूजन के अलावा नदी की आरती उनकी पांच सौ वर्षों की परंपरा है। इसे उनसे छीना जा रहा है। अगर भव्यता के नाम पर मंदिर समिति आरती कराने की बात कह रही है तो भव्यता के सुझाव उन्हें दिए जाएं। आरती वे ही करेंगे। इधर मंदिर समिति ने कहा कि यह पूरा आयोजन निशुल्क होगा।


शिप्रा नदी में उतर कर जल सत्याग्रह किया

शनिवार को तीर्थपुरोहितों ने लगातार दूसरे दिन भी विरोध करते हुए शिप्रा नदी में उतर कर जल सत्याग्रह किया। उल्लेखनीय है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने गुरुवार शाम रामघाट के समीप शिप्रा आरती की शुरुआत की थी। मंदिर समिति द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान के 21 विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती की थी। प्रशासन के इस निर्णय को तीर्थ परंपरा के परिष्कार तथा वैदिक शिक्षा को सम्मान दिलाने का माध्यम माना जा रहा है।

देशभर में बटुक कर रहे हैं वेदाध्ययन

दरअसल, उज्जैन में श्री महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान तथा श्री महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के माध्यम से देशभर में बटुक वेदाध्ययन कर रहे हैं। वेद, ज्योतिष, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा की डिग्री प्राप्त कर रहे हैं।

मंदिर समिति का मानना है कि वेदाध्ययन कर चुके बटुक तीर्थ तथा मंदिरों की धार्मिक व्यवस्था को और भी अधिक शास्त्र सम्मत व सशक्त बना सकते हैं। आरती शुरू करने के पीछे यही सोच है। मंदिर समिति का कहना है कि तीर्थ पुरोहितों से जुड़ी परंपरा में वे किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।

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त्रिमुहूर्त से अधिक पूर्णिमा 28 को

ज्योतिर्विद् गुलशन अग्रवाल के अनुसार यदि पूर्णिमा के दौरान अपराह्न काल में भद्रा हो तो रक्षाबंधन नहीं मनाना चाहिए। ऐसे में यदि पूर्णिमा अगले दिन के शुरुआती तीन मुहूर्तों में हो तो पर्व के सारे विधि-विधान अगले दिन के अपराह्न काल में करने चाहिए। इस वर्ष यही स्थिति बन रही है।

27 अगस्त गुरुवार को श्रावणी पूर्णिमा पूर्णतः अपराह्न व्यापिनी है लेकिन इस दिन अपराह्न में भद्रा दोष रहेगा। इसके चलते 27 अगस्त को रक्षाबंधन बिल्कुल नहीं हो सकता। 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा सूर्योदय से सुबह 09.48 तक त्रिमुहूर्त से अधिक है। साथ ही इस दिन पूर्णिमा पूरी तरह भद्रा से रहित है। अतः 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा।