वन कर्मियों को चकमा देकर शावक जंगल में गायब, तीन दिन से हाथी और पैदल गश्तीदल कर रहे मशक्कत
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कांटीवाह बाघिन के रेस्क्यू किए गए दो शावकों में से एक बड़े एनक्लोजर में शिफ्टिंग के दौरान वनकर्मियों को चकमा देकर जंगल में न ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 07 Jan 2026 01:45:29 PM (IST)Updated Date: Wed, 07 Jan 2026 01:45:29 PM (IST)
शावक बड़े एनक्लोजर में शिफ्टिंग के दौरान भागा। (फोटो- नईदुनिया प्रतिनिधि)HighLights
- शिफ्टिंग के दौरान बाघ शावक एनक्लोजर से जंगल में भागा।
- वनकर्मियों को चकमा देकर खुले जंगल में गया शावक।
- तीसरे दिन भी शावक का कोई सुराग नहीं मिला।
उमरिया, नईदुनिया प्रतिनिधि। पिछले साल अक्टूबर में लावारिश अवस्था में मिले कांटीवाह बाघिन के दो में से एक शावक छोटे से बड़े एनक्लोजर में शिफ्टिंग के दौरान वन कर्मियों को चकमा देकर जंगल में गायब हो गया। इस तरह खुले जंगल में निकल जाने से शावक की जान खतरे में पड़ सकती है। यह घटना सोमवार को हुई।
वन प्रबंधन लगातार शावक की तलाश में जुटा हुआ है। हालांकि तीसरे दिन भी शावक का कहीं कुछ पता नहीं चला। इस मामले में तीसरे दिन वन प्रबंधन घटना की पुष्टि की है। पार्क प्रबंधन का कहना है कि बाघ शावक के पगमार्क कई जगह दिखाई दिए हैं। उम्मीद है कि उसे जल्द तलाश लेंगे।
इस तरह दिया चकमा
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ अनुपम सहाय ने बताया कि अक्टूबर में लावारिश अवस्था में मिले दोनों शावकों को ताला ताला परिक्षेत्र के बठान बीट के इनक्लोजर में पालन-पोषण के लिए रखा गया था। इन दोनों शावकों को बड़े इनक्लोजर में शिफ्ट किया जाना था, जिसके लिए पांच जनवरी की शाम साढ़े छह बजे शावकों को ट्रांसलोकेट करने के लिए इनक्लोजर में केज लगाया गया था।
- इसी दौरान एक शावक केज की आड़ लेकर इनक्लोजर से बाहर निकल गया और जंगल में गायब हो गया। वन कर्मी समझते रहे कि शावक केज के अंदर चला गया है। वनकर्मियों को शावक दिखाई नहीं दिया, तो उसकी तलाश शुरू की गई।
कांटीवाह बाघिन लापता है और उसका तीसरा शावक भी दिखाई नहीं पड़ रहा है। जिन दो शावकों को तीन दिन पहले पार्क प्रबंधन ने रेस्क्यू किया था उन्हें कांटीवाह बाघिन के शावक ही माना जा रहा है। जबकि अभी पार्क प्रबंधन ने यह नहीं माना है कि तीन तारीख को जिस बाघ का कंकाल मिला था वह कांटीवाह वाली बाघिन ही थी।
हालांकि प्रबंधन जिस तरह से तीसरे शावक की तलाश कर रहा है और बाघिन के बारे में कोई खोज-खबर नहीं ली जा रही है उससे यही स्पष्ट होता है कि तीन तारीख को जिस कंकाल को बरामद किया गया था वह कांटीवाह बाघिन का ही था। लावारिश मिले थे दोनों शावक
बांधवगढ़ के पनपथा रेंज की सलखनिया बीट के कक्ष नंबर पी-610 मे अक्टूबर की नौ तारीख को लावारिश हालत में मिले थे। गश्ती दल को एक शावक गिरे हुए पेड़ की खोह में घुसता हुआ दिखा। जिसके तत्काल बाद वनकर्मियों ने हाथियों के माध्यम से क्षेत्र की सघन सर्चिंग की, लेकिन बड़े नर अथवा मादा बाघ के कोई भी चिन्ह नहीं मिले। बताया गया है कि क्षेत्र संचालक के निर्देशानुसार एवं मार्गदर्शन मे पेड़ की खोह मे पाये गये दोनो शावक बाघों का रेस्क्यू कर ताला ले जाया गया। तब से यह दोनों शावक ताला के बठान में ही थे।
नहीं मिला तीसरा शावक
- यह दोनों शावक कांटीवाह बाघिन के थे यह उसी समय स्पष्ट हो गया था। उस समय यह जानकारी भी सामने आई थी कि कांटीवाह बाघिन के तीन शावक थे, जबकि तीसरा शावक काफी तलाश के बाद भी नहीं मिला था। जिले के बांधवगढ टाईगर रिजर्व अंतर्गत पनपथा बफर रेंज की सलखनियां बीट मे मिले दो शावकों को ताला में सुरक्षित पहुंचाने के बाद अमला तीसरे शावक की तलाश मे जुट गया था पर उसका कहीं भी पता नहीं चला।
गौरतलब है कि सलखनिया के इसी जंगली इलाके मे लंबे समय से बीटीआर की मशहूर कांटीवाह बाघिन का मूवमेंट था। बीते तीन अक्टूबर को यहीं पर एक बाघ का शव मिला था। शव काफी पुराना और क्षत-विक्षत होने से यह सटीक अनुमान नहीं लग पा रहा था कि वह किस बाघ अथवा बाघिन का था। चूंकि कई दिनो से कांटीवाह बाघिन और उसके तीन शावकों का कोई लोकेशन नहीं मिल रहा था। ऐसे में यह शंका बलवती हो गई थी कि मृत अवशेष कांटीवाह बाघिन का ही था।