
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। शनिवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गौर पुनर्स्थापना की दिशा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब 24 जनवरी को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 8 भारतीय गौर को विशेष रूप से तैयार वाहनों के माध्यम से लाकर सफलतापूर्वक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। इससे पूर्व दिनांक 23 जनवरी 2026 को भी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए 5 भारतीय गौरों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की कल्लवाह रेंज में सॉफ्ट रिलीज किया गया था।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 22 जनवरी से 27 जनवरी 2026 के मध्य कुल 27 भारतीय गौरों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से कैप्चर कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाने की योजना है। यह संपूर्ण गौर ट्रांसलोकेशन एवं पुनर्स्थापना कार्यक्रम मध्य प्रदेश वन विभाग एवं वन्यजीव संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में परियोजना के अंतर्गत किया जा रहा है।
1990 के दशक के उत्तरार्ध में आवास के क्षरण के कारण बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भारतीय गौर प्रजाति विलुप्त हो गई थी। के परामर्श से मध्य प्रदेश शासन द्वारा बांधवगढ़ में गौर पुनर्स्थापना परियोजना प्रारंभ की गई, जिसके अंतर्गत वर्ष 2010–11 में कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौर तथा फरवरी 2025 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 22 गौर यहां लाए जा चुके हैं।
भारतीय गौर की पुनर्स्थापना हेतु सर्वप्रथम स्वस्थ झुंड का चयन किया जाता है। यह चयन विस्तृत सर्वेक्षण के आधार पर किया जाता है तथा जहां तक संभव हो, स्थानांतरित किए जाने वाले जानवरों के बीच सामाजिक संरचना एवं आपसी बंधन बनाए रखने हेतु एक ही झुंड से गौरों को पकड़ने का प्रयास किया जाता है। वास्तविक कैप्चर ऑपरेशन से लगभग एक माह पूर्व झुंड चयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाती है।
वास्तविक कैप्चर ऑपरेशन एक विस्तृत एवं श्रम आधारित वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एनिमल डार्टिंग टीम की होती है, जिसमें अनुभवी वन्यजीव चिकित्सक शामिल रहते हैं, जिनका दायित्व गौर को चिह्नित कर सुरक्षित रूप से निश्चेत करना होता है। इसके पश्चात ट्रैकिंग टीम डार्टिंग के बाद जानवर का पीछा कर उसे सुरक्षित स्थान पर लाती है। इस दौरान सीढ़ी टीम, क्षेत्र सफाई टीम भी तैनात रहती हैं।
स्वास्थ्य मॉनिटरिंग टीम द्वारा ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं एवं गौर का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। तत्पश्चात एनिमल लिफ्टिंग एवं स्ट्रेचर टीम निश्चेतित गौर को सावधानीपूर्वक उठाकर रेस्क्यू वाहन तक पहुंचाती है। अंत में गौर परिवहन टीम रेस्क्यू वाहन के माध्यम से गौरों को सतपुड़ा से बांधवगढ़ लाकर सुरक्षित बाड़ों में छोड़ती है।
इस प्रकार गौर पुनर्स्थापना एक पूर्व नियोजित, समयबद्ध, श्रमसाध्य एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित ऑपरेशन है, जिसे सफलतापूर्वक संपन्न करने हेतु मॉक ड्रिल, तकनीकी दक्षता एवं विभिन्न दलों के आपसी समन्वय की आवश्यकता होती है। बांधवगढ़ लाने के पश्चात गौरों की निरंतर एवं सतत निगरानी की जाती है। डॉ अनुपम सहाय के नेतृत्व में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की सजगता, वैज्ञानिक प्रबंधन एवं अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज 190 से अधिक भारतीय गौर यहां प्राकृतिक परिवेश में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं।