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पन्ना टाइगर रिजर्व में IRS अधिकारी के रिसार्ट पर बड़ा खुलासा, 35.80 एकड़ वनभूमि बना, पट्टों पर भी सवाल

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में रिसार्ट वाली खसरा नंबर 1841 की 35.80 एकड़ भूमि 1967 से संरक्षित वनभूमि अधिसूचित है। पट्टों और निर्माण पर सवाल उठ...और पढ़ें

By SanjayKumar SharmaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 07:25:20 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 07:34:23 AM (IST)
पन्ना टाइगर रिजर्व में IRS अधिकारी के रिसार्ट पर बड़ा खुलासा, 35.80 एकड़ वनभूमि बना, पट्टों पर भी सवाल
पन्ना टाइगर रिजर्व में IRS अधिकारी के रिसार्ट पर बड़ा खुलासा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. खसरा नंबर 1841 की 35.80 एकड़ भूमि वनभूमि है।
  2. वनभूमि वर्ष 1967 से संरक्षित वनभूमि अधिसूचित है।
  3. करीब पांच एकड़ क्षेत्र में आलीशान रिसार्ट बनाया गया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में राजगढ़ गांव स्थित जिस खसरा नंबर 1841 की भूमि पर वरिष्ठ आइआरएस अधिकारी बी.श्रीनिवास कुमार ने आलीशान रिसार्ट बनवाया है, उसका बड़ा हिस्सा वन भूमि है। इस खसरा नंबर की जमीन ज्यादा है, जिसके करीब पांच एकड़ में रिसार्ट बनाया गया है।

भले ही कथित तौर पर यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि यह राजस्व भूमि है लेकिन सच्चाई यह है कि सामान्य वन मंडल छतरपुर के वन मंडलाधिकारी द्वारा 15 सितंबर 2025 को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि खसरा नंबर 1841 की कुल 42.50 एकड़ भूमि में से 35.80 एकड़ भूमि वर्ष 1967 से संरक्षित वनभूमि के रूप में अधिसूचित की गई थी।


यह दस्तावेज अब इस भूमि पर हुए निर्माण और इसके स्वामित्व से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि जांच में पहले ही यह बात सामने आ जाने के बावजूद वन विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने से बचते रहे। मामला तूल पकड़ने के बाद अब कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

35.80 एकड़ भूमि संरक्षित वनभूमि के रूप में अधिसूचित

  • बता दें कि इसी मामले में पिछले वर्ष पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक को भेजे गए पत्र में खसरा नंबर 1841 की भूमि की जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में जवाब दिया गया है।
  • इसमें बताया गया है कि उक्त खसरे की भूमि में वनखंड अजुनिया अंतर्गत 25.10 एकड़, वनखंड पाटन अंतर्गत 7.70 एकड़ और वनखंड तोरिया-बी अंतर्गत तीन एकड़ (कुल 35.80 एकड़) भूमि संरक्षित वनभूमि के रूप में वर्ष 1967 से अधिसूचित है। इसका उल्लेख कार्यालयीन अभिलेखों में भी दर्ज होने की बात कही गई है।

वनभूमि पर राजस्व पट्टे प्रदान किए जाने पर आपत्ति

  • खास बात यह है कि दस्तावेज में राजस्व विभाग द्वारा वनभूमि पर राजस्व पट्टे प्रदान किए जाने को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। वन विभाग ने अपने जवाब में वर्ष 1972 में सिंहदेव योजना के अंतर्गत धारा 34-3 के तहत जिले के वनक्षेत्र में शामिल खसरा नंबरों को राजस्व विभाग को हस्तांतरित न किए जाने का उल्लेख किया है। पत्र में वर्ष 1976 में पंचमढ़ी में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णय का भी उल्लेख किया गया है।
  • वन विभाग के अनुसार शासन के निर्देशों में ऐसी वनभूमि, जो वनों के लिए अधिक उपयोगी हो अथवा जिस पर मूल्यवान वन मौजूद हो, उसे पुनः वन विभाग के कब्जे में लेने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में खसरा नंबर 1841 पर बने रिसार्ट को लेकर भूमि की वैधानिक स्थिति की जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

इनका कहना है

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से जुड़े राजगढ़ गांव स्थित वन भूमि के पट्टे राजस्व विभाग ने पहले कभी बांटे थे। जबकि यह वन भूमि है और इस पर राजस्व अधिकारियों से चर्चा हो रही है। - वीरेंद्र पटेल, डिप्टी डायरेक्टर-पीटीआर।

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