
अजय जैन, विदिशा। कुरवाई तहसील के ग्राम कुल्हन की रहने वाली रागिनी विश्वकर्मा के लिए नीट सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों का आधार थी। आठ सदस्यों के परिवार में सबसे बड़ी बेटी रागिनी विश्वकर्मा ने आठवीं कक्षा में ही डॉक्टर बनने का सपना देखा था। पिता उमेश विश्वकर्मा मकान निर्माण में मजदूरी करते हैं और करीब नौ हजार रुपए मासिक आय में परिवार का गुजारा करते हैं। घर में दादा-दादी, तीन बेटियां और एक छोटा बेटा है। सीमित आमदनी के बावजूद पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए निजी फाइनेंस कंपनी से 70 हजार रुपए का कर्ज लिया और ऑनलाइन कोचिंग की फीस जमा कराई।
रागिनी बताती है कि उसने एक साल का ड्रॉप लेकर नीट की तैयारी की थी। रोज आठ से दस घंटे पढ़ाई करती थी। तीन मई को हुई परीक्षा में उसका पेपर भी अच्छा गया था और उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन पेपर लीक प्रकरण के कारण परीक्षा निरस्त हो गई। इसके बाद उसने खुद को संभाला और फिर से तैयारी शुरू कर दी। रोज 10 से 12 घंटे पढ़ाई की, लेकिन दो मिनट की देरी ने उसके एक साल की मेहनत पर पानी फेर दिया।
बारिश, पंचर और बंद हो चुका गेट
रागिनी के अनुसार रविवार को वह सुबह साढ़े दस बजे पिता के साथ मोटरसाइकिल से विदिशा के लिए निकली थी। रास्ते में अंबानगर चौराहे पर बाइक पंचर हो गई, जिससे करीब 15 मिनट का समय खराब हुआ। इसके बाद ढोलखेड़ी के पास तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई। पिता ने रास्ते में कहीं रुकना उचित नहीं समझा और धीमी गति से बाइक चलाते हुए परीक्षा केंद्र की ओर बढ़ते रहे।
रागिनी बताती है कि वह दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर शासकीय कन्या महाविद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र पहुंची। वह और उसके पिता भागते हुए गेट तक पहुंचे, लेकिन उनके सामने ही प्रवेश द्वार बंद कर दिया गया। हमने हाथ जोड़े, विनती की, केंद्राध्यक्ष को बुलाने की मांग की, लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी।
केंद्राध्यक्ष के इंतजार में निकल गया मौका
रागिनी का आरोप है कि करीब 15 मिनट बाद केंद्राध्यक्ष वहां पहुंचीं और उन्होंने उसकी बात सुनकर अंदर जाने की अनुमति दी। लेकिन तब तक बायोमीट्रिक प्रक्रिया बंद हो चुकी थी। अगर केंद्राध्यक्ष समय पर आ जातीं और हमारी बात सुन लेतीं तो शायद मेरा साल खराब नहीं होता, वह कहती है।
उधर बेटी को परीक्षा से वंचित होते देख पिता उमेश विश्वकर्मा खुद पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने परीक्षा केंद्र के गेट पर सिर पटक लिया। उनकी हालत बिगड़ गई और वे सड़क पर बैठकर रोने लगे। यह दृश्य देखकर रागिनी भी फूट-फूटकर रो पड़ी।
अब दोबारा तैयारी के बारे में सोच भी नहीं पा रही
रागिनी का कहना है कि घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीडियो कॉल कर हौसला बढ़ाया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। एसडीओपी रोशनी ठाकुर ने भी उसे निराश न होने की सलाह दी। हालांकि वह कहती है कि उसके क्षेत्र के किसी जनप्रतिनिधि ने अब तक परिवार से संपर्क नहीं किया।
पापा आज भी कह रहे हैं कि फिर से तैयारी करो, हम जैसे-तैसे व्यवस्था कर लेंगे। लेकिन अभी मेरी मानसिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं आगे के बारे में सोच सकूं। मुझे लगता है कि मेरा एक साल मुझसे छीन लिया गया है। रागिनी की आंखें यह कहते हुए भर आती हैं।
इंटरनेट मीडिया पर छाया रहा मुद्दा
नीट सेंटर के बाहर गेट पर सिर पटकने और बेटी के भविष्य के लिए गिड़गिड़ाते पिता का वीडियो सोमवार को इंटरनेट मीडिया पर जमकर बहु-प्रसारित हुआ। प्रदेश कांग्रेस से लेकर नेशनल कांग्रेस तक के अकाउंट से इसे जारी किया गया। देश भर के हजारों लोगों ने इस वीडियो को शेयर कर एनटीए की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई, लेकिन परीक्षा में जुट जिम्मेदार लोगों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की।
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