भारत में 6 साल में 1.8 लाख पैदल यात्रियों की मौत, सुप्रीम कोर्ट सख्त; सुरक्षित फुटपाथ बनाने के निर्देश
भारत में 2019-2024 के बीच सड़क हादसों में 1.8 लाख से अधिक पैदल यात्रियों की मौत हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित फुटपाथ और पैदल मार्ग सुनिश्चित करने के ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 12:26:22 PM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jun 2026 12:33:13 PM (IST)
भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर आई सामने। (एआई जनरेटेड)HighLights
- छह वर्षों में 1.8 लाख पैदल यात्रियों की मौत।
- राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुईं कुल मौतों की 31 प्रतिशत।
- 54 प्रतिशत मौतें कार और दोपहिया टक्कर से हुईं।
डिजिटल डेस्क। भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर लगातार सामने आ रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच देशभर में सड़क दुर्घटनाओं में 1.8 लाख से अधिक पैदल यात्रियों की मौत हुई है।
यानी हर साल औसतन 30,500 से ज्यादा लोग सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा रहे हैं, क्योंकि सड़कों पर उनके लिए सुरक्षित व्यवस्था नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पैदल चलने वालों की सुरक्षा लंबे समय से उपेक्षित रही है और यही वजह है कि मौतों का यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी पैदल चलने को नागरिकों का मौलिक अधिकार बताते हुए सरकार को फुटपाथ और सुरक्षित पैदल मार्गों के लिए ठोस कानून बनाने के निर्देश दिए हैं।
छह साल में 1.8 लाख से ज्यादा पैदल यात्रियों की मौत
- सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच सड़क हादसों में 1.8 लाख से अधिक पैदल यात्रियों की जान गई। इनमें से लगभग 31 प्रतिशत मौतें राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि देश की हाई-स्पीड सड़कों पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा बेहद कमजोर है।
- रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 में पैदल यात्रियों की लगभग 54 प्रतिशत मौतें दोपहिया वाहनों और कारों की टक्कर से हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, असुरक्षित सड़क डिजाइन और फुटपाथों की कमी इन हादसों के प्रमुख कारण हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने माना पैदल चलना मौलिक अधिकार
- पैदल यात्रियों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि सुरक्षित रूप से पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
- कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए स्पष्ट रूप से सीमांकित फुटपाथ और सुरक्षित पैदल मार्ग सुनिश्चित किए जाएं। इससे पहले भी शीर्ष अदालत फुटपाथों के अतिक्रमण और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुकी है।
पैदल यात्रियों की मौत में तमिलनाडु सबसे आगे
- मंत्रालय की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, पैदल यात्रियों की मौत के मामलों में तमिलनाडु सबसे ऊपर है, जहां 4,712 लोगों की जान गई। इसके बाद बिहार में 4,149, महाराष्ट्र में 3,344 और पश्चिम बंगाल में 3,241 मौतें दर्ज की गईं।
- रिपोर्ट यह भी बताती है कि 10 लाख से अधिक आबादी वाले 53 बड़े शहरों में 4,328 पैदल यात्रियों की मौत हुई, जो कुल मौतों का लगभग 11.8 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में हादसे शहरों से बाहर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर हो रहे हैं।
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सुरक्षित फुटपाथों की कमी सबसे बड़ी समस्या
- इंडिया रोड सेफ्टी कैंपेन के प्रमुख अमर श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार को शहरी क्षेत्रों के बाहर होने वाली पैदल यात्रियों की मौतों के वास्तविक कारणों का गहन अध्ययन करना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर सुरक्षित पैदल मार्ग विकसित करने की आवश्यकता है।
- सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व संयुक्त सचिव अभय दामले के अनुसार, देश में फुटपाथ और पैदल यात्री सुविधाओं के लिए मानक पहले से मौजूद हैं। समस्या इन मानकों की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है।
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राजमार्गों पर चेतावनी बोर्ड लगाने का सुझाव
- सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक अन्य मामले में एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट साइनेज और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। ऐसे संकेतक लोगों को संभावित खतरों के प्रति सचेत कर सकते हैं और दुर्घटनाओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सड़क निर्माण की सोच केवल वाहनों तक सीमित रहेगी, तब तक पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी। बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग नागरिकों के लिए सुरक्षित फुटपाथ और सड़क पार करने की व्यवस्था अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।