'शराब घोटाले' के भूत से छूटा अरविंद केजरीवाल का पीछा! कोर्ट ने CBI को लताड़ा, पढ़ें क्या-क्या कहा
राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति CBI मामले में Arvind Kejriwal सहित 23 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया, साजिश थ्योरी और एप्रूवर बयानों को अस ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 27 Feb 2026 02:09:14 PM (IST)Updated Date: Fri, 27 Feb 2026 02:09:14 PM (IST)
शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को मिली राहत। (फाइल फोटो)HighLights
- 23 आरोपी साक्ष्य अभाव में बरी।
- साजिश की थ्योरी कोर्ट ने खारिज।
- एप्रूवर बयानों पर कड़ी टिप्पणी।
एजेंसी, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष अदालत ने आबकारी नीति से जुड़े CBI मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया।
विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक परीक्षण में टिक नहीं सका। किसी भी आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया आरोप तय करने लायक आधार नहीं है।
CBI ने दावा किया था कि नई आबकारी नीति के जरिए व्यापक आपराधिक साजिश रची गई और चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाकर रिश्वत ली गई।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसी किसी व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा का ठोस प्रमाण नहीं है। केवल आशंकाओं और कथित कड़ियों के आधार पर आपराधिक साजिश स्थापित नहीं की जा सकती।
आरोप तय करने लायक आधार नहीं
चार्जशीट में कथित अनियमितताओं, बैठकों और लेन-देन का हवाला दिया गया था। अदालत ने पाया कि 23 में से किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। अदालत ने चार्ज पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए सभी को डिस्चार्ज कर दिया।
एप्रूवर के बयानों पर कड़ी टिप्पणी
CBI ने एक आरोपी को माफी देकर सरकारी गवाह बनाया था। उसके बयानों के आधार पर कथित साजिश की कड़ियां जोड़ी थीं। अदालत ने कहा कि एप्रूवर के बयानों से जांच की कमियां दूर करना और नए लोगों को आरोपी बनाना संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत हो सकता है। इसे स्वीकार करना न्याय प्रक्रिया के लिए खतरनाक मिसाल बनेगा।
जांच प्रक्रिया पर सवाल
सार्वजनिक सेवक कुलदीप सिंह को आरोपी नंबर-1 बनाने के तरीके पर भी अदालत ने आपत्ति जताई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की बात कही। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अभियोजन ने साजिश की 'कहानी गढ़ने' की कोशिश की, जबकि आपराधिक मुकदमे में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होते हैं।