
डिजिटल डेस्क। आयकर विभाग (Income Tax Department) ने रेस्टोरेंट उद्योग में अब तक के सबसे बड़े टैक्स चोरी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। हैदराबाद की तीन मशहूर बिरयानी चेन से शुरू हुई यह जांच अब एक ऐसे राष्ट्रव्यापी घोटाले में बदल गई है, जिसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये की आय छिपाने का अनुमान है।
इस हाई-प्रोफाइल जांच की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टैक्स चोरी के इस "गड़बड़झाले" को पकड़ने के लिए विभाग को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत फोरेंसिक तकनीक का सहारा लेना पड़ा।
जांच में खुलासा हुआ है कि देशभर के लगभग 1.7 लाख रेस्टोरेंट एक खास किस्म के बिलिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे। इस सॉफ्टवेयर को विशेष रूप से टैक्स चोरी के लिए डिजाइन किया गया था:
आयकर अधिकारियों ने इस केस में तकनीक का अभूतपूर्व इस्तेमाल किया है। जांच की भयावहता को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
विवरण - आंकड़े
कुल छिपाई गई आय (अनुमानित) - ₹70,000 करोड़
आंध्र और तेलंगाना का हिस्सा - ₹5,000 करोड़ से अधिक
सॉफ्टवेयर से दर्ज कुल बिक्री - ₹2.4 लाख करोड़
डिलीट किए गए बिलों का प्रतिशत - 14% तक
जांच के दायरे में रेस्टोरेंट - 1.7 लाख (देशभर में)
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सूत्रों का कहना है कि यह केवल बिल डिलीट करने तक सीमित नहीं था। हजारों फर्जी या अनधिकृत पैन कार्ड्स के जरिए बिक्री को अलग-अलग खातों में बांट दिया जाता था ताकि किसी भी एक इकाई (Entity) का टर्नओवर टैक्स सीमा से अधिक न दिखे। फिलहाल, विभाग की आईटी टीम डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटी है ताकि रिकवरी की सटीक राशि तय की जा सके।