
डिजिटल डेस्क, गंगटोक। पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्य सिक्किम में इस वर्ष मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। मूसलाधार बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण पश्चिम सिक्किम का खूबसूरत रिम्बी गांव अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन जल्द ही इस संपूर्ण गांव को निवास के दृष्टिकोण से 'अयोग्य' घोषित करने का आधिकारिक फैसला ले सकता है।
आपदा की शुरुआत बीते अगस्त महीने में हुई, जब सिंग्लिटाम की ऊंची ढलानों में कटाव और धंसाव शुरू हुआ। 13 अगस्त को दो मकानों के प्रभावित होने के साथ शुरू हुआ यह संकट 14 अगस्त की मूसलाधार बारिश के बाद तेजी से बढ़ा और देखते ही देखते 30 से अधिक परिसरों को अपनी चपेट में ले लिया। वर्तमान में इस क्षेत्र के लगभग 32 रिहाइशी मकान, चार सरकारी आवासीय परिसर और कई अन्य कच्चे व अर्ध-पक्के ढांचे पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
मित खोला के समीप स्थित जिन क्षेत्रों को पहले सुरक्षित माना जा रहा था, वे भी अब उफनती नदियों और पहाड़ों से आ रहे मलबे तथा कीचड़ के बहाव की चपेट में आ गए हैं। ढलानों के लगातार खिसकने से ग्रामीणों के बीच भय का माहौल व्याप्त है।
25 सितंबर को आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे सिक्किम आपदा राहत आयुक्त रिंजिंग चेवांग ने स्पष्ट किया कि सिंग्लिटाम से हो रहे निरंतर भूस्खलन के कारण रिम्बी अब मानव बसाहट के योग्य नहीं रह गया है।
प्रशासनिक स्तर पर तत्परता दिखाते हुए 107 प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर बने ग्राम प्रशासन केंद्र के राहत शिविर में ठहराया गया है। इसके अतिरिक्त सिंग्लिटाम के 9 असुरक्षित घरों को खाली करवाकर परिजनों को सुरक्षित स्थलों पर भेजा गया है। राहत आयुक्त ने जानकारी दी कि मानसून समाप्त होने के उपरांत विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम (मल्टीडिसिप्लिनरी टीम) द्वारा विस्तृत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जियोलॉजिकल सर्वे) कराया जाएगा।
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सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि नागरिकों की जीवन सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को मुस्तैद रहने के कड़े निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार ने पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1.3 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही 'सिक्किम हाउसिंग स्कीम' के तहत जिन परिवारों की भूमि आपदा में बह गई है, उन्हें सरकार द्वारा नया भूखंड एवं मकान प्रदान किया जाएगा। जिन लोगों के पास अपनी भूमि सुरक्षित बची है, उन्हें नया गृह निर्माण करने हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।