बिहार में NEET री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश, असली की जगह नकली परीक्षार्थियों ने लिखे पेपर; 30 गिरफ्तार
नीट-यूजी सॉल्वर गैंग मामले में बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध का खुलासा हुआ है। मेडिकल छात्रों और स्टाफ की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा दिल ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 01:29:41 PM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jun 2026 01:31:02 PM (IST)
बिहार में NEET री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश। (एआई जनरेटेड)HighLights
- बायोमेट्रिक सत्यापन में सेंध लगाकर सॉल्वर अंदर पहुंचाए गए।
- पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र नेटवर्क का मास्टरमाइंड निकला।
- मेडिकल छात्रों को सॉल्वर बनाकर परीक्षा में बैठाया गया।
डिजिटल डेस्क। बिहार के लखीसराय में सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। नीट री-एग्जाम में इन्होंने असली की जगह नकली परीक्षार्थी बैठा दिए। गंभीर मामले की पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि परीक्षा केंद्रों की बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में भी सेंध लगाई गई थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार मेडिकल छात्रों, बायोमेट्रिक स्टाफ और एजेंटों के गठजोड़ से ये खतरनाक नेटवर्क तैयार हुआ था, जिसके जरिए असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वरों को परीक्षा दिलाई गई। पुलिस ने 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर रची गई साजिश
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर मौजूद बायोमेट्रिक सत्यापन सिस्टम में सेंध लगा ली थी। आरोप है कि बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कुछ कर्मचारी उनसे मिले हुए थे, जिसकी मदद से फर्जी परीक्षार्थियों को असली अभ्यर्थियों के स्थान पर केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाया गया। यही कारण रहा कि कई सॉल्वर बिना शक के परीक्षा हॉल आराम से पहुंच गए।
पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र बना मास्टरमाइंड
- जांच एजेंसियों के मुताबिक पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र रविशंकर इस पूरे नेटवर्क का सरगना है। उसने कई मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को सॉल्वर बनाया। उन्हें परीक्षा में बैठाने की पूरी प्लानिंग तैयार की।
- गिरोह ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था, जो मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए बड़ी रकम खर्च करने को तैयार बैठे हों। उसके बाद पूरी प्रोसेस अंजाम दिया जाता था।
मेडिकल छात्र ने निभाई बायोमेट्रिक स्टाफ की भूमिका
- जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार पटना मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र और हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया।
- आरोप है कि इसी के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। सॉल्वरों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया गया। उसके बाद फर्जी परीक्षार्थियों ने वास्तविक उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दी।
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अब तक 30 गिरफ्तार, कई और रडार पर
- पुलिस ने अब तक 9 सॉल्वरों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र बताए जा रहे हैं। इनके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मियों और गिरोह के अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया है।
- गिरफ्तार लोगों में एक मूल परीक्षार्थी भी शामिल है। पुलिस कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
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10 से 12 लाख रुपये में होता था सौदा
- लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार के अनुसार प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये तक में सौदा तय किया था। इसमें एक से दो लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे, जबकि बाकी रकम परीक्षा में सफलता और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने के बाद ली जाती थी।
पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है। केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य एवं सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत की शिकायत पर मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।