

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में रोजाना करोड़ों यात्री ट्रेनों के जरिए सफर करते हैं। ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की संसद में पेश रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट में कई प्रमुख स्टेशनों के पेयजल में E. Coli bacteria और Total Coliform बैक्टीरिया पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
'Passenger Amenities and Sanitation at Non-Suburban Railway Stations in Indian Railways' शीर्षक वाली CAG रिपोर्ट वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच किए गए ऑडिट पर आधारित है। इसके तहत देश के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों की यात्री सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था की जांच की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे बोर्ड ने यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं और पेयजल की गुणवत्ता को लेकर नियम एवं दिशा-निर्देश निर्धारित किए थे। इसके बावजूद कई क्षेत्रीय रेलवे जोन इन मानकों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं कर सके। छह अलग-अलग जोन के 59 स्टेशनों पर पेयजल की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तक नहीं कराई गई।
CAG की जांच में लिए गए पानी के नमूनों में कई जगह चिंताजनक नतीजे सामने आए। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), कल्याण, लोनावाला और भिवंडी रोड के वाटर कूलरों के पानी में E. Coli बैक्टीरिया पाया गया।
इसी तरह साउदर्न रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन के वाटर कूलरों का पानी भी दूषित मिला। साउथ सेंट्रल रेलवे के हैदराबाद स्टेशन के पेयजल में भी E. Coli की मौजूदगी सामने आई। वहीं ईस्टर्न रेलवे के मधुपुर स्टेशन का पानी भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 में आठ जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी में Total Coliform बैक्टीरिया मिले। ऐसे बैक्टीरिया दूषित पानी के जरिए पाचन तंत्र और पेट से जुड़ी संक्रामक बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
CAG ने अपनी रिपोर्ट में केवल पेयजल की गुणवत्ता पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि स्टेशन परिसरों में स्वच्छता और शौचालयों की स्थिति का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई जगह साफ-सफाई और रखरखाव की कमी के कारण यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।
पैसेंजर एमेनिटीज मैनेजमेंट सिस्टम (PAMS) के आंकड़ों के मुताबिक, 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी पाई गई। इसके अलावा 403 स्टेशनों पर पर्याप्त मूत्रालय नहीं थे, जबकि 201 स्टेशनों पर शौचालयों की संख्या निर्धारित मानकों से कम थी।
STORY | CAG flags E. coli bacteria in drinking water at stations, cites violation of Railway Board norms
The Comptroller and Auditor General of India (CAG) found that the Railway Ministry had framed several norms for passenger amenities at stations; however, zones failed to… pic.twitter.com/UKjAnHAv9F
— Press Trust of India (@PTI_News) August 15, 2026
रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में निर्देश जारी किए थे कि अगस्त 2018 तक सभी रेलवे स्टेशनों पर पीने का पानी, बैठने की जगह, शेड, शौचालय, पंखे, फुट ओवर ब्रिज और सूचना बोर्ड जैसी न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
लेकिन CAG की जांच में शामिल 512 स्टेशनों में से 458 स्टेशन ऐसे मिले, जहां ये बुनियादी सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं थीं या निर्धारित मानकों के मुकाबले काफी कम थीं। यानी करीब 89 प्रतिशत स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाओं को लेकर कमी सामने आई।
रिपोर्ट में देश के प्रमुख NSG-1 श्रेणी के स्टेशनों की स्थिति का भी उल्लेख है। न्यू दिल्ली, हावड़ा, सियालदह, मुंबई सेंट्रल और CSMT जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर भी पर्याप्त सीटें, पंखे, वाटर कूलर, डस्टबिन और ट्रेन सूचना डिस्प्ले बोर्ड या तो उपलब्ध नहीं मिले या खराब स्थिति में पाए गए।
यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए CAG ने रेलवे मंत्रालय और प्रशासन को व्यवस्था में तत्काल सुधार की सिफारिश की है। रिपोर्ट में यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल के तहत रेलवे स्टेशनों की जल आपूर्ति व्यवस्था और पानी की गुणवत्ता की नियमित एवं कड़ी निगरानी करने पर जोर दिया गया है।
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CAG का कहना है कि यात्रियों को सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए रेलवे को निर्धारित मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना चाहिए।