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CJP प्रदर्शन मामला: सुप्रीम कोर्ट का 'पुलिस की ज्यादतियों' की जांच के लिए बनी कमेटी को फिर से बनाने से इनकार, कहा- आरोप सिर्फ अटकलें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी को फिर से बना...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 12:55:31 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 12:55:31 PM (IST)
CJP प्रदर्शन मामला: सुप्रीम कोर्ट का 'पुलिस की ज्यादतियों' की जांच के लिए बनी कमेटी को फिर से बनाने से इनकार, कहा- आरोप सिर्फ अटकलें

HighLights

  1. बेंच ने कहा, हम कमेटी के गठन में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं
  2. संवेदनशील गवाहों को उचित सुरक्षा दी जाए, पहचान गोपनीय रखी जाए
  3. सबूत जमा करने के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा सकता है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी को फिर से बनाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कमेटी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिर्फ अटकलें और पहले से बनी धारणाएं हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि कमेटी को निष्पक्षता और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों और बिना किसी पक्षपात के नजरिए से मदद करने के लिए बनाया गया है।


हम कमेटी के गठन में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं

मंगलवार को ऑनलाइन अपलोड किए गए 10 सितंबर के आदेश में बेंच ने कहा कि हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) को कोर्ट के सामने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के लिए नहीं बनाया गया है। बेंच ने कहा, हम कमेटी के गठन में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं हैं।

खासकर तब जब इसे फिर से बनाने की मांग सिर्फ अटकलों और पहले से बनी धारणाओं पर आधारित हो, जो कमेटी के जांच शुरू करने से पहले ही जाहिर कर दी गई थीं।

शीर्ष अदालत ने हाई पावर्ड कमेटी से कहा कि वह पैलेट गन के इस्तेमाल, टारगेटेड हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न, साथ ही दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति के नुकसान से जुड़े मुद्दों पर अपनी जांच जारी रखे।

संवेदनशील गवाहों को उचित सुरक्षा दी जाए, पहचान गोपनीय रखी जाए

कोर्ट ने कहा, गवाहों और उन लोगों के साथ बर्ताव को लेकर जताई गई चिंताओं के संबंध में जो कमेटी के सामने आकर अपनी बात रखना और अपनी शिकायतें बताना चाहते हैं, हम कमेटी से अनुरोध करते हैं कि ऐसे संवेदनशील गवाहों को उचित सुरक्षा दी जाए और उनकी पहचान गोपनीय रखी जाए।

कोर्ट ने कहा, यह कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसे संवेदनशील गवाहों द्वारा कमेटी को दिए गए किसी भी बयान या सबूत के संबंध में पूरी गोपनीयता बरती जाएगी।

सबूत जमा करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा सकता है

इसके अलावा, ऐसे गवाहों और अन्य जरूरी लोगों को अपने दस्तावेज और सबूत जमा करने में मदद के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा सकता है। बेंच ने कहा, इसी तरह हम कमेटी से यह भी अनुरोध करते हैं कि वह जल्द से जल्द एक सदस्य सचिव नियुक्त करे, ताकि उसे अपने काम को पूरा करने के लिए जरूरी लॉजिस्टिकल या अन्य सेक्रेटेरियल मदद मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की जांच के लिए पूर्व शीर्ष अदालत के जज आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था।

अदालत ने कहा था कि समिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी एल.आर. बिश्नोई शामिल होंगे।

इस कमेटी का गठन कई बातों को ध्यान में रखकर किया गया है, जिसमें इसके प्रत्येक सदस्य की व्यक्तिगत विशेषज्ञता और अनुभव के साथ-साथ समिति की विविधता और अन्य कारक शामिल हैं। बेंच ने कहा था, हमें भरोसा है कि कमेटी की सिफारिशें इस अदालत के लिए बहुत मददगार साबित होंगी और समिति उन सभी मुद्दों का व्यापक मूल्यांकन करने में सक्षम होगी जिन पर उचित विचार-विमर्श की आवश्यकता है।

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