
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में डीटीसी (DTC) और क्लस्टर बसों में रोजाना सफर करने वाली लाखों महिलाओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। चर्चाएं तेज हैं कि आगामी 1 जुलाई 2026 से बसों में महिलाओं को मिलने वाला मुफ्त सफर पूरी तरह बंद होने जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर बस स्टैंडों तक इस खबर ने महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन क्या वाकई सरकार इस ऐतिहासिक सुविधा को वापस ले रही है? या फिर कहानी कुछ और है? आइए जानते हैं इस पूरे मामले का सच और नया नियम।
राहत की बात यह है कि दिल्ली सरकार महिलाओं की मुफ्त यात्रा की सुविधा को बंद नहीं कर रही है, बल्कि इसके तौर-तरीकों में एक बड़ा और पारदर्शी बदलाव करने जा रही है। 1 जुलाई से बसों में मिलने वाली पुरानी 'पिंक टिकट' (Pink Ticket) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इसकी जगह अब केवल 'पिंक कार्ड' (Pink Card) धारक महिलाएं और विशेष श्रेणी के यात्री ही बसों में मुफ्त सफर का लाभ उठा सकेंगे। यानी, अब बिना पिंक कार्ड के मुफ्त यात्रा मुमकिन नहीं होगी।

ये तस्वीर एआई से बनाई गई है
सरकार ने यह कड़ा कदम मुफ्त टिकटों के बड़े पैमाने पर हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया है। दरअसल, पहले कंडक्टर से मिलने वाले कागज के पिंक टिकट का कई बार गलत इस्तेमाल देखा गया था। कई बार पुरुष यात्री भी इसे हासिल कर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर कब्जा कर लेते थे। इसके अलावा, फर्जी टिकटों और कागजी टिकटों के खो जाने की शिकायतें भी लगातार आ रही थीं। अब पिंक कार्ड अनिवार्य होने से इस पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और फर्जीवाड़ा रुकेगा।

ये तस्वीर एआई से बनाई गई है

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नियम लागू होने की आखिरी तारीख नजदीक आते ही दिल्ली के विभिन्न पिंक कार्ड केंद्रों पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद नेहरू प्लेस स्थित मुख्य पिंक कार्ड केंद्र पर सुबह से ही महिलाओं की लंबी-लंबी कतारें मुख्य सड़क तक पहुंच गईं, जिससे कुछ समय के लिए अव्यवस्था भी देखने को मिली। चूंकि सोमवार को इन केंद्रों में अवकाश रहता है, इसलिए अब महिलाओं के पास कार्ड बनवाने के लिए बेहद सीमित समय बचा है।