
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। देश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए केंद्र सरकार डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा E-Zero FIR पहल शुरू की गई है। इसके लागू होने के बाद साइबर धोखाधड़ी का शिकार व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेगा और उसे डिजिटल रिसीप्ट भी प्राप्त होगी।
वर्तमान समय में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी अक्सर एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई को तेज करने के लिए E-Zero FIR व्यवस्था तैयार की गई है, जिससे शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान और तेज हो सकेगी।
E-Zero FIR को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत वैधानिक मान्यता प्राप्त है। इस डिजिटल सिस्टम को गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा तैयार किया गया है।
इस व्यवस्था के तहत शिकायतकर्ता घर बैठे साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कर सकता है। ऑनलाइन दर्ज की गई शिकायत तय नियमों के अनुसार स्वतः जीरो FIR में बदल सकती है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) या हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। नियमों के अनुसार यदि साइबर धोखाधड़ी की रकम 10 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो ऑनलाइन दर्ज शिकायत स्वतः E-Zero FIR के रूप में पंजीकृत हो जाती है। इसके बाद शिकायतकर्ता को E-Zero FIR की डिजिटल प्रमाणित कॉपी व्हॉट्सएप या ईमेल के माध्यम से भेज दी जाती है।
देश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने E-Zero FIR व्यवस्था को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि साइबर अपराधों पर तत्काल कार्रवाई हो सके और अपराधियों तक जल्द पहुंच बनाई जा सके। फिलहाल यह प्रणाली 9 राज्यों में पूरी तरह लागू है।
आमतौर पर किसी अपराध की FIR उसी पुलिस थाने में दर्ज होती है, जहां घटना हुई हो। लेकिन जीरो FIR व्यवस्था में शिकायत किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है, चाहे घटना का क्षेत्राधिकार कुछ भी हो। जब इसी व्यवस्था को डिजिटल रूप दिया जाता है तो इसे E-Zero FIR कहा जाता है। इसमें ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज होने के कारण पीड़ित को थानों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
E-Zero FIR दर्ज होने के बाद मामला क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) के जरिए संबंधित राज्य या जिले के साइबर थाने को जांच के लिए भेज दिया जाता है।
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार शिकायतकर्ता को E-Zero FIR दर्ज होने के तीन दिन के भीतर संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन जाकर अपने बयान का सत्यापन कराना होता है। इसके बाद E-Zero FIR नियमित FIR में परिवर्तित हो जाती है।
साइबर अपराधों में शुरुआती 1 से 3 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। E-Zero FIR व्यवस्था के जरिए शिकायत तुरंत दर्ज होने से संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्रवाई कर सकेंगी। इससे उन बैंक खातों को जल्द फ्रीज करने में मदद मिलेगी, जिनमें अपराधियों द्वारा पैसे ट्रांसफर कराए जाते हैं। इससे पीड़ितों को आर्थिक नुकसान से बचाने की संभावना बढ़ेगी।
E-Zero FIR का सबसे बड़ा फायदा यह है कि साइबर अपराध पीड़ितों को FIR दर्ज कराने के लिए बार-बार पुलिस थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
केंद्रीय डिजिटल सिस्टम के जरिए पुलिस, बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। इससे अलग-अलग राज्यों में बैठे साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो सकेगी।