
डिजिटल डेस्क। आय से अधिक संपत्ति मामले में घिरे कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार की संपत्ति को लेकर आर्थिक अपराध इकाई की जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। शुरुआती जांच में उन्हें आय से 81 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोपित माना गया था, लेकिन अब छापेमारी और उनके द्वारा पहले घोषित संपत्ति विवरण की तुलना में कई बड़े अंतर सामने आए हैं।
93 दिन में इतना हुआ नकदी में इजाफा
सबसे बड़ा खुलासा नकदी को लेकर हुआ है। 12 फरवरी को जमा किए गए संपत्ति विवरण में गोपाल कुमार ने अपने पास सिर्फ 22,180 रुपये नकद होने की जानकारी दी थी, जबकि 16 मई को आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी में उनके ठिकानों से 47.68 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। महज 93 दिनों में नकदी में यह उछाल करीब 215 गुना बताया जा रहा है।
जांच के दौरान एजेंसी को एक फ्लैट के लिए 80 लाख रुपये नकद भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। अगर इस रकम को भी जोड़ लिया जाए, तो फरवरी से मई के बीच नकदी में बढ़ोतरी 544 गुना से अधिक बैठती है। बैंक खातों के मामले में भी घोषित आंकड़ों और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर मिला है। फरवरी में उन्होंने बचत खाते में 3.82 लाख रुपये जमा होने की जानकारी दी थी, जबकि छापेमारी में मिले तीन बैंक खातों में 10 लाख रुपये से ज्यादा राशि मिलने की बात सामने आई है।
सोने के आभूषणों में ज्यादा अंतर नहीं मिला
सोने के आभूषणों में ज्यादा अंतर नहीं मिला। फरवरी में 390 ग्राम सोना घोषित किया गया था, जो मई में बढ़कर 424.80 ग्राम पाया गया। हालांकि जांच एजेंसी को 47 लाख रुपये के आभूषण खरीद से जुड़े बिल भी मिले हैं। इसके अलावा जीवन बीमा पॉलिसियों के मामले में भी जानकारी छुपाने का आरोप लगा है। जहां फरवरी में उन्होंने केवल तीन बीमा पॉलिसियों का जिक्र किया था, वहीं छापेमारी में सात पॉलिसियों के दस्तावेज मिले हैं। बताया जा रहा है कि इन पॉलिसियों पर हर साल करीब 3.50 लाख रुपये प्रीमियम भरा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि दानापुर बाजार समिति में निर्माणाधीन जी प्लस थ्री भवन और लक्ष्मीपुर कॉटेज में फोर बीएचके फ्लैट के लिए 80 लाख रुपये नकद भुगतान जैसी जानकारियां उन्होंने अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं की थीं।
दूसरी तरफ, घोषित संपत्ति विवरण में यह भी सामने आया कि गोपाल कुमार पर करीब 70 लाख रुपये का कर्ज है। उन्होंने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से 35.40 लाख रुपये का हाउसिंग लोन और एचडीएफसी फाइनेंस से 25 लाख रुपये का अन्य लोन लेने की जानकारी दी थी।
कार्रवाई का असर ठेकेदारों पर भी
इस कार्रवाई का असर अब ठेकेदारों पर भी पड़ता दिख रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग में भुगतान प्रक्रिया शुरू होने ही वाली थी कि अभियंता पर कार्रवाई की खबर सामने आ गई। ठेकेदारों को आशंका है कि यदि अभियंता निलंबित होते हैं, तो भुगतान फिर से लंबा खिंच सकता है। बताया जा रहा है कि हाल ही में झाझा डिवीजन को 84 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था।
क्रेटा कार को लेकर भी सवाल खड़े
वहीं, छापेमारी में जब्त की गई क्रेटा कार को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कार के दस्तावेजों में सुरेंद्र प्रसाद का नाम दर्ज है, लेकिन उसमें गोपाल कुमार का मोबाइल नंबर मिलने के बाद इसे बेनामी संपत्ति माना जा रहा है। अब यह सुरेंद्र कौन है और उसका अभियंता से क्या संबंध है, इसकी भी जांच की जा रही है।