देहरादूनः अस्पताल के ICU में आग से महिला मरीज की मौत, 11 लोग घायल, घायलों में एक नवजात शिशु और तीन पुलिसकर्मी शामिल
देहरादून के पैनेसिया हॉस्पिटल में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में ICU में भर्ती महिला मरीज की मौत हो गई, जबकि कुल 11 लोग घायल हुए हैं। ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 20 May 2026 01:49:43 PM (IST)Updated Date: Wed, 20 May 2026 01:51:33 PM (IST)
देहरादून के पैनेसिया हॉस्पिटल में बुधवार को अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई।HighLights
- आग लगने की वजह एसी में ब्लास्ट मानी जा रही
- पूरे अस्पताल परिसर को खाली करा लिया गया
- फायर सेफ्टी इंतजामों पर उठे सवाल
डिजिटल डेस्क, देहरादून। देहरादून के पैनेसिया हॉस्पिटल में बुधवार को अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में ICU (Intensive Care Unit) में भर्ती 55 वर्षीय महिला मरीज की मौत हो गई, जबकि कुल 11 लोग घायल हुए हैं। घायलों में एक नवजात शिशु और बचाव कार्य में जुटे तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
छह मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने की वजह एसी में ब्लास्ट मानी जा रही है। घटना के बाद पूरे अस्पताल परिसर को खाली करा लिया गया।
धुआं फैलते ही मची भगदड़, तत्काल शुरू हुआ रेस्क्यू
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक ICU और आसपास के हिस्सों में धुआं भरने लगा, जिससे मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। अस्पताल स्टाफ और स्थानीय लोगों ने तुरंत मरीजों को वार्डों से बाहर निकालना शुरू किया। कई मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर बाहर लाया गया और एंबुलेंस के जरिए अन्य अस्पतालों में भेजा गया।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
अधिकारी मौके पर पहुंचे, जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही विनय शंकर पांडेय, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह और एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। फायर विभाग ने आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच शुरू कर दी है।
फायर सेफ्टी इंतजामों पर उठे सवाल
इस हादसे ने शहर के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में फायर सेफ्टी इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई अस्पताल सीमित जगह, संकरे रास्तों और कमजोर सुरक्षा मानकों के बीच संचालित हो रहे हैं। इमरजेंसी एग्जिट, पर्याप्त पार्किंग और दमकल की आसान पहुंच जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं कई जगह नदारद हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फायर ऑडिट और मॉक ड्रिल जैसे जरूरी उपाय अक्सर कागजों तक सीमित रह जाते हैं। हादसे के बाद कुछ दिनों की सख्ती दिखती है, लेकिन समय बीतते ही लापरवाही फिर लौट आती है।
बिजली उपकरणों और AC सिस्टम की निगरानी पर भी प्रश्न
प्रारंभिक जांच में एसी ब्लास्ट को संभावित कारण बताया जा रहा है, जिससे अस्पतालों में लगे बिजली उपकरणों और एयर कंडीशनिंग सिस्टम की नियमित मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठे हैं। जब अस्पतालों में रोजाना गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं, तब आपदा से निपटने की तैयारी इतनी कमजोर क्यों है। यह सवाल अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने है।