
डिजिटल डेस्क। पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार ने वर्ष 2026 के लिए अपना नया बजट पेश कर दिया है। विकास की रफ्तार बढ़ाने और हर वर्ग को साधने के इरादे से लाए गए इस बजट में युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों और जरूरतमंदों के लिए कई बड़े नीतिगत फैसलों का ऐलान किया गया है।
बजट की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में 1 लाख नई सरकारी नौकरियां, कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में ऐतिहासिक बढ़ोतरी और महिलाओं के लिए मुफ्त सफर जैसी योजनाएं शामिल हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस बार के बजट में किस वर्ग को क्या सौगातें मिली हैं।
बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। राज्य के अलग-अलग महकमों में कुल 1 लाख नई सरकारी भर्तियां की जाएंगी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा और सुरक्षा क्षेत्र को मिला है, जहां 50 हजार शिक्षकों व शिक्षण कर्मचारियों और 20 हजार पुलिसकर्मियों के पद भरे जाएंगे। युवाओं को राहत देते हुए सरकारी नौकरियों में ऊपरी आयु सीमा में 5 साल की छूट दी गई है, जो अगले दो वर्षों तक मान्य रहेगी। इसके अलावा, देश की सेवा करने वाले अग्निवीरों के लिए नौकरियों में 10 फीसदी पद आरक्षित रखे जाएंगे।
जो युवा फिलहाल नौकरी की तलाश में हैं, उनके लिए अक्टूबर महीने से 'भरोसा' नामक नई बेरोजगारी भत्ता योजना शुरू होने जा रही है। इसके तहत 21 से 45 वर्ष के उन शिक्षित बेरोजगार युवाओं को वित्तीय मदद दी जाएगी, जिनके परिवार की सालाना कमाई 1 लाख रुपये से कम है। योजना के तहत ग्रेजुएट युवाओं को हर महीने 3,000 रुपये और अन्य पात्र युवाओं को 2,000 रुपये का मासिक भत्ता मिलेगा। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए हर जिले में मुफ्त कोचिंग सेंटर भी खोले जाएंगे।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए नई सरकारी भर्तियों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, महिलाओं के सफर को आसान और मुफ्त बनाने के लिए 550 करोड़ रुपये के बजट के साथ 'पिंक कार्ड' सुविधा शुरू की जाएगी, जिसके जरिए वे बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी।
राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए यह बजट बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। उनके महंगाई भत्ते (DA) में 20 प्रतिशत की भारी वृद्धि की घोषणा की गई है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। इस बढ़ोतरी के बाद राज्यकर्मियों का कुल डीए बढ़कर 38 फीसदी हो जाएगा, जिससे केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के भत्ते का अंतर काफी हद तक कम हो जाएगा।
ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले कर्मियों को भी बजट में पूरा सम्मान मिला है:
कमजोर तबके को सहारा देने के लिए वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशन की राशि में हर महीने 500 रुपये की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही 'अन्नपूर्णा योजना' के लिए सरकार ने 36,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट तय किया है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक स्कूलों के मिड-डे मील की प्रति बच्चा सामग्री लागत को बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है, और कोलकाता में इस्कॉन के सहयोग से न्यूट्रिशियस फूड बांटा जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में, झाड़ग्राम और बांकुड़ा में दो नए केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे, जिनमें से झाड़ग्राम वाला संस्थान पूरी तरह आदिवासी विश्वविद्यालय के रूप में काम करेगा। इसके अलावा, आदर्श विद्यालयों के विकास के लिए 2,100 करोड़ रुपये और संस्कृत व स्थानीय भाषाओं के प्रचार के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। खेल जगत को बढ़ावा देने के लिए उत्तर बंगाल में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनेगा, जबकि हर विधानसभा क्षेत्र में 5-5 करोड़ रुपये की लागत से मिनी इनडोर स्टेडियम तैयार किए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने साफ किया कि राज्य में पहले से चल रही सभी कल्याणकारी योजनाएं बंद नहीं होंगी, बल्कि उन्हें अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि लाभ सीधे असली हकदार तक पहुंचे। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए 'आपकी सरकार, आपके द्वार' (आपका सरकार, आपका पाशे) नाम से एक नई जन-हितैषी पहल शुरू की जा रही है।
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स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए विधायक निधि (MLA Fund) को 70 लाख रुपये से बढ़ाकर अब सीधे 1 करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है। हालांकि, इन लोक-कल्याणकारी घोषणाओं के बीच वित्त मंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति का ब्योरा देते हुए यह भी साझा किया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल पर कुल कर्ज का बोझ 8,15,891 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।