
डिजिटल डेस्क। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों और देश के पहले बैच के अग्निवीरों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय रेलवे और भारतीय सेना ने एक साझा प्रतिबद्धता के तहत "सहयोग का ढांचा" (Framework of Cooperation) शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सैन्य सेवा के बाद जवानों को नागरिक जीवन में एक सम्मानजनक और स्थिर 'द्वितीय करियर' (Second Career) प्रदान करना है।
रेल मंत्रालय ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए विशेष क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) सुनिश्चित किया है। यह आरक्षण अलग-अलग श्रेणियों में इस प्रकार होगा:
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 की भर्ती अधिसूचनाओं में पूर्व सैनिकों के लिए कुल 14,788 पद आरक्षित रखे गए हैं। इनमें से 6,485 पद लेवल-1 के हैं और 8,303 पद लेवल-2 या उससे ऊपर के हैं। इन पदों पर नियुक्तियां रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और रेलवे भर्ती केंद्रों (RRC) के माध्यम से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं द्वारा की जाएंगी।
त्वरित रोजगार को बढ़ावा देने के लिए रेलवे ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक, पूर्व सैनिकों को संविदा (Contract) आधार पर 'पॉइंट्समैन' के पद पर नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए 5,000 से अधिक पदों की योजना है, जिसके लिए देश के 9 रेलवे मंडलों ने सेना के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
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यह रणनीतिक तालमेल विशेष रूप से उन अग्निवीरों के लिए संजीवनी साबित होगा, जो 2026 में अपने पहले बैच के रूप में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और रेल मंत्रालय के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल से न केवल नौकरियों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए एक समर्पित सहायता प्रणाली भी स्थापित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेना का अनुशासन और रेलवे की कार्यप्रणाली मिलकर राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को नई गति प्रदान करेंगे। इस सहयोग से पूर्व सैनिकों को समाज में सम्मानजनक स्थान और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।
(एएनआई इनपुट के आधार पर)