
डिजिटल डेस्क। भारत के छोटे और मध्यम शहरों (Tier-2 और Tier-3) में बढ़ती गर्मी को लेकर एक नई रिसर्च ने डराने वाले खुलासे किए हैं। 'प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज' की स्टडी के मुताबिक, अनियोजित शहरीकरण के कारण मथुरा, जालंधर और मुजफ्फरनगर जैसे शहर देश के नए 'हॉटस्पॉट' बन रहे हैं।
पेरिस समझौते के तहत यदि वैश्विक तापमान में 2 डिग्री की वृद्धि होती है, तो भी छोटे शहरों पर इसका असर कहीं ज्यादा होगा। स्टडी के अनुसार, एशिया और अफ्रीका के 104 मध्यम श्रेणी के शहरों (आबादी 3-10 लाख) में तापमान ग्रामीण इलाकों के मुकाबले बहुत तेजी से बढ़ेगा।
भारत में शहरी तापमान ग्रामीण इलाकों की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ सकता है। उत्तर और मध्य भारत के कई शहर इस जोखिम की अग्रिम पंक्ति में हैं। सबसे प्रभावित शहरों की बात करें तो जालंधर, बठिंडा, पटियाला, मथुरा, मुजफ्फरनगर, हिसार, रोहतक, सतना, शाहजहांपुर और गया जैसे शहरों में गर्मी का स्तर अनुमान से दो गुना तक बढ़ सकता है। 'काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरनमेंट एंड वॉटर' के मुताबिक, भारत की 76% आबादी अत्यधिक गर्मी के खतरे में है।
रिसर्च के अनुसार, छोटे शहरों के ज्यादा गर्म होने की तीन मुख्य वजहें हैं...
विशेषज्ञों का मानना है कि अब पुराने तरीकों से काम नहीं चलेगा। शहरों को बचाने के लिए ये कदम अनिवार्य हैं। शहरी क्षेत्रों में हरित पट्टी (Green Belts) और कूल रूफ (सफेद छतें) को बढ़ावा देना। स्थानीय स्तर पर गर्मी की चेतावनी देने वाले तंत्र और सामुदायिक कूलिंग सेंटर का निर्माण। पेड़ों और जलाशयों को शहरी नक्शे का हिस्सा बनाना।
सोर्स: प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज स्टडी
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