
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा असर अब महिलाओं के बीच दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत चार साल में लगभग दोगुना हो गया है।
2019-21 में जहां केवल 33.3 फीसदी महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती थीं, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 फीसदी पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा और डिजिटल पहुंच दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच मौजूद असमानताएं अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
NFHS-6 के अनुसार, 6 वर्ष और उससे अधिक आयु की लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति दर बढ़कर 73.7 फीसदी हो गई है, जो पिछले सर्वेक्षण में 71.8 फीसदी थी। वहीं 2 से 4 वर्ष के बच्चों की प्री-स्कूल में उपस्थिति 40.1 फीसदी से बढ़कर 47 फीसदी तक पहुंच गई है।
महिलाओं की शिक्षा के स्तर में भी सुधार दर्ज किया गया है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं का अनुपात, जिन्होंने 10 वर्ष या उससे अधिक की स्कूली शिक्षा प्राप्त की है, 41 फीसदी से बढ़कर 46.4 फीसदी हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 50.2 फीसदी से बढ़कर 54.6 फीसदी दर्ज किया गया।
डिजिटल पहुंच के मामले में शहरी और ग्रामीण भारत के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। शहरी क्षेत्रों में 77.3 फीसदी महिलाओं ने इंटरनेट इस्तेमाल करने की बात कही, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 58.6 फीसदी रहा।
मोबाइल फोन की उपलब्धता में भी यही तस्वीर सामने आई। राष्ट्रीय स्तर पर 63.6 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उनके पास अपना मोबाइल फोन है और उसका उपयोग वे स्वयं करती हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा घटकर 57.4 फीसदी रह गया, जबकि शहरी इलाकों में 77.6 फीसदी महिलाओं के पास अपना मोबाइल फोन है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2 से 4 वर्ष के बच्चों की प्री-स्कूल में बढ़ती उपस्थिति आंगनवाड़ी और प्री-प्राइमरी शिक्षा कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी का संकेत है। शहरी क्षेत्रों में प्री-स्कूल उपस्थिति 50 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 46 फीसदी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और मोबाइल तक महिलाओं की बढ़ती पहुंच डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। यह बदलाव ऑनलाइन शिक्षा, कौशल विकास, सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं तक महिलाओं की पहुंच को मजबूत करेगा।
हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि डिवाइस, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता तक समान पहुंच सुनिश्चित करना अब नीति निर्माताओं के सामने अगली बड़ी चुनौती होगी। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल अंतर को कम किए बिना शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ सभी तक पहुंचाना आसान नहीं होगा।
NFHS-6 के आंकड़े देश की जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव का भी संकेत देते हैं। 15 वर्ष से कम आयु की आबादी का हिस्सा 26.5 फीसदी से घटकर 25.5 फीसदी रह गया है, जबकि पांच वर्ष से कम उम्र की आबादी 8.2 फीसदी से घटकर 8 फीसदी हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये बदलाव आने वाले वर्षों में स्कूलों में नामांकन, शिक्षकों की मांग और शिक्षा के बुनियादी ढांचे की योजना पर सीधा असर डाल सकते हैं।
कुल मिलाकर, NFHS-6 की रिपोर्ट बताती है कि भारत की महिलाएं तेजी से डिजिटल दुनिया से जुड़ रही हैं। इंटरनेट और शिक्षा तक बढ़ती पहुंच सामाजिक बदलाव की नई कहानी लिख रही है, लेकिन इस बदलाव को समावेशी बनाने के लिए ग्रामीण-शहरी खाई को पाटना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।