IMD बारिश-तूफान आने का पहले से कैसे कर लेता है पता? रडार से सैटेलाइट तक... ऐसे होती है मौसम की निगरानी
डॉपलर रडार, सैटेलाइट, समुद्री बॉय, वेदर बैलून और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन से जुटाए गए डेटा का विश्लेषण कर सटीक मौसम पूर्वानुमान तैयार किया जाता है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 14 Jun 2026 02:53:14 PM (IST)Updated Date: Sun, 14 Jun 2026 02:53:14 PM (IST)
रडार, सैटेलाइट और सुपर कंप्यूटर से मौसम की भविष्यवाणी (AI Generated Image)HighLights
- डॉपलर रडार से बादलों की गतिविधि पर नजर
- सैटेलाइट हर 15 मिनट में डेटा भेजते वेदर
- समुद्री बॉय से समुद्री हलचल की जानकारी
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भारी बारिश, तूफान और चक्रवात जैसी मौसमीय घटनाओं का कई दिन पहले अनुमान लगाने में सक्षम है। इसके लिए विभाग मौसम रडार, सैटेलाइट, मॉनिटरिंग स्टेशन, समुद्री बॉय और सुपर कंप्यूटर आधारित गणितीय मॉडल का उपयोग करता है।
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डॉपलर रडार से मिलती रियल टाइम जानकारी
आईएमडी के डॉपलर वेदर रडार 150 से 200 किलोमीटर तक मौसम प्रणालियों पर नजर रखते हैं। ये बादलों की चाल, बारिश की तीव्रता, हवा की दिशा और तूफान की गति का सटीक विश्लेषण करते हैं।
समुद्र और आसमान से जुटाया जाता डेटा
समुद्री बॉय समुद्र की सतह का तापमान और लहरों की गतिविधि रिकॉर्ड करते हैं। वहीं, वेदर बैलून ऊपरी वायुमंडल में तापमान, दबाव और नमी की जानकारी जुटाते हैं।
सैटेलाइट और स्टेशन से लगातार निगरानी
मौसम संबंधी सैटेलाइट हर 15 मिनट में भारतीय उपमहाद्वीप की ताजा जानकारी भेजते हैं। देशभर में लगे ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन तापमान, बारिश, नमी और हवा की रफ्तार रिकॉर्ड करते हैं।