बदल गया केरल का नाम, मोदी कैबिनेट ने इस नाम की दी मंजूरी
'सेवा तीर्थ' में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। मोदी कैबिनेट ने केरल राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर 'केरलम' ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 24 Feb 2026 03:27:59 PM (IST)Updated Date: Tue, 24 Feb 2026 03:27:59 PM (IST)
बदल गया केरल का नाम, अब 'केरलम' के नाम से जाना जाएगाHighLights
- मोदी कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी
- केरल विधानसभा ने जून 2024 में सर्वसम्मति से पास किया था नाम बदलने का बिल
- चुनावों से पहले भाषाई अस्मिता को सम्मान देने के लिए लिया गया ऐतिहासिक फैसला
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित नवनिर्मित पीएमओ बिल्डिंग 'सेवा तीर्थ' में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। मोदी कैबिनेट ने केरल राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।
विजयन सरकार की सांस्कृतिक पहल को मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस प्रस्ताव को पेश करते हुए स्पष्ट किया था कि राज्य की अपनी भाषा मलयालम में इसे 'केरलम' ही कहा जाता है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी समुदायों के लिए एक एकीकृत 'केरलम' बनाने की मांग उठती रही है। हालांकि, भारतीय संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम 'केरल' दर्ज है, जिसे अब बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
दूसरी बार में सफल हुआ प्रस्ताव
यह प्रस्ताव केरल विधानसभा से दूसरी बार पास होकर केंद्र तक पहुंचा था...
अगस्त 2023: सदन ने पहली बार सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा था।
गृह मंत्रालय का सुझाव: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तत्कालीन प्रस्ताव की समीक्षा के बाद इसमें कुछ तकनीकी बदलावों (Technical Changes) का सुझाव दिया था।
जून 2024: गृह मंत्रालय के सुझावों को शामिल करते हुए केरल विधानसभा ने दोबारा प्रस्ताव पारित किया।
कैबिनेट की मुहर: मंगलवार को 'सेवा तीर्थ' (नई पीएमओ बिल्डिंग) में हुई कैबिनेट बैठक में इस संशोधित प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई।
संविधान की आठवीं अनुसूची में होगा बदलाव
मुख्यमंत्री विजयन का मुख्य आग्रह यह था कि केंद्र सरकार न केवल आधिकारिक कार्यों में, बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करे। इस फैसले से राज्य की भाषाई अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव को नई पहचान मिलेगी।
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