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LPG New Rule: सरकार ने लागू किए 30 और 90 दिन के नए नियम, उपभोक्ताओं को करना होगा ये काम, वरना कटेगा कनेक्शन

घरेलू गैस कनेक्शन को लेकर केंद्र सरकार ने 'वन हाउस, वन गैस कनेक्शन' नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार इस पहल के जरिए दोहरे गैस कनेक्शनों के चलन ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 29 Jun 2026 03:16:02 PM (IST)Updated Date: Mon, 29 Jun 2026 03:16:02 PM (IST)
LPG New Rule: सरकार ने लागू किए 30 और 90 दिन के नए नियम, उपभोक्ताओं को करना होगा ये काम, वरना कटेगा कनेक्शन
डुप्लीकेट गैस कनेक्शन और सब्सिडी की कालाबाजारी पर रोक।

HighLights

  1. डुप्लीकेट गैस कनेक्शन और सब्सिडी की कालाबाजारी पर रोक
  2. जानें आपके शहर में किन लोगों पर लागू होगा 90 दिन का नियम
  3. क्लीन फ्यूल को बढ़ावा देने के लिए नियमों में किया बड़ा बदलाव

डिजिटल डेस्क। घरेलू गैस कनेक्शन को लेकर केंद्र सरकार ने 'वन हाउस, वन गैस कनेक्शन' नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था के तहत रसोई गैस सिलेंडरों (LPG) के इस्तेमाल को लेकर '30 दिन' और '90 दिन' की दो समय-सीमाएं तय की गई हैं। इस फैसले का सीधा असर उन शहरी और अर्ध-शहरी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिनके क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की पाइपलाइन बिछ चुकी है।

सरकार इस पहल के जरिए एक ही घर में दोहरे गैस कनेक्शनों के चलन को पूरी तरह समाप्त करना चाहती है।

क्या है 30 दिनों की समय-सीमा का नियम?

नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता के घर में पीएनजी (PNG) का नया कनेक्शन चालू हो जाता है, तो उसे अगले 30 दिनों के भीतर अपना पुराना एलपीजी (LPG) कनेक्शन अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा। सरल शब्दों में कहें तो, यदि आपके घर में 1 जून को पाइप वाली गैस शुरू हुई है, तो 30 जून से पहले आपको अपना रसोई गैस सिलेंडर वाला कनेक्शन वापस करना होगा ताकि सब्सिडी का दुरुपयोग रोका जा सके।


90 दिनों का अल्टीमेटम: क्यों जरूरी है शिफ्ट होना?

दूसरा नियम उन क्षेत्रों के लिए है जहां पीएनजी की सुविधा पहले से ही घर-घर तक पहुंच चुकी है। ऐसे इलाकों में रह रहे एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी में तब्दील (शिफ्ट) होने के लिए अधिकतम 90 दिनों की मोहलत दी जा रही है। तय अवधि के भीतर शिफ्ट न होने की स्थिति में तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी कनेक्शन को सस्पेंड या हमेशा के लिए ब्लॉक किया जा सकता है। इसके लिए कंपनियों ने उपभोक्ताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

नियमों के दायरे में आने वाले उपभोक्ता

  • पाइपलाइन वाले क्षेत्र: यह नियम केवल उन्हीं रिहायशी इलाकों में प्रभावी होगा जहां पीएनजी नेटवर्क पूरी तरह चालू है।
  • दोहरे कनेक्शन वाले घर: जिनके पास एलपीजी सिलेंडर और पीएनजी दोनों की सुविधाएं मौजूद हैं, उन्हें एक विकल्प छोड़ना होगा।
  • शहरी उपभोक्ता: महानगरों और बड़े शहरों के रिहायशी सोसायटियों में रहने वाले लोग इससे मुख्य रूप से प्रभावित होंगे।
  • राहत की बात: ग्रामीण क्षेत्रों और ऐसे दूर-दराज के इलाकों में जहां अभी तक पीएनजी पाइपलाइन नहीं पहुंची है, वहां एलपीजी सिलेंडर की व्यवस्था पहले की तरह ही सुचारू रूप से जारी रहेगी। वहां इन नियमों का कोई असर नहीं होगा।

इस बड़े बदलाव के पीछे सरकार का क्या है उद्देश्य?

  • फर्जी और दोहरे कनेक्शनों पर लगाम: एक ही नाम या पते पर चल रहे मल्टीपल गैस कनेक्शनों को ढूंढकर बंद करना।
  • सटीक सब्सिडी वितरण: एलपीजी पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ केवल उन्हीं जरूरतमंदों तक पहुंचाना जिन्हें वाकई इसकी आवश्यकता है।
  • हरित ऊर्जा (Clean Fuel) को बढ़ावा: पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित माने जाने वाले पीएनजी के इस्तेमाल के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करना।

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क्या भविष्य में पूरी तरह बंद हो जाएंगे LPG सिलेंडर?

इस कदम का मतलब यह कतई नहीं है कि देश से रसोई गैस सिलेंडर पूरी तरह गायब हो जाएंगे। सरकार का लक्ष्य एलपीजी को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि पीएनजी ग्रिड वाले क्षेत्रों में इसकी निर्भरता को कम करना है। भौगोलिक रूप से जिन हिस्सों में पाइपलाइन बिछाना संभव नहीं है, वहां एलपीजी ही रसोई का मुख्य आधार बनी रहेगी।