
डिजिटल डेस्क। पहलगाम आतंकी हमले की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि हमले की तैयारी काफी पहले से की जा रही थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की पड़ताल में आतंकियों के पास मिले मोबाइल फोन जांच का अहम आधार बनकर उभरे हैं।
आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी
पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन महादेव के दौरान तीन आतंकियों को मार गिराया था। मुठभेड़ के बाद उनके कब्जे से बरामद मोबाइल फोन अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
दो स्मार्टफोन पाकिस्तान में अलग-अलग समय पर पहुंची खेप
जांच में सामने आया कि आतंकियों के पास मौजूद दो स्मार्टफोन पाकिस्तान में अलग-अलग समय पर पहुंची खेप का हिस्सा थे। इनमें से एक मोबाइल वर्ष 2021 में और दूसरा 2023 में पाकिस्तान पहुंचा था। दोनों उपकरण लंबे समय तक निष्क्रिय रहे और हमले से ठीक पहले सक्रिय किए गए।
जांच एजेंसियों ने मोबाइल उपकरणों के पहचान नंबर के आधार पर उनकी सप्लाई चेन और वितरण से जुड़ी जानकारी जुटाई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि फोन कानूनी आयात प्रक्रिया के तहत पाकिस्तान पहुंचे थे, लेकिन उनके बाद के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
एक फोन वर्षों तक किसी नेटवर्क से नहीं जुड़ा
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक फोन वर्षों तक किसी नेटवर्क से नहीं जुड़ा। उसमें न कोई सिम इस्तेमाल हुई और न ही किसी प्रकार की कॉल या डेटा गतिविधि दर्ज हुई। इसके बावजूद वह बाद में आतंकियों के पास मिला। दूसरे फोन के मामले में भी लगभग इसी तरह का पैटर्न सामने आया है।
नेटवर्क की तलाश की जा रही
जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों मोबाइलों का वर्षों तक निष्क्रिय रहना और फिर एक ही आतंकी मॉड्यूल तक पहुंचना महज संयोग नहीं हो सकता। इसी वजह से अब उन लोगों और नेटवर्क की तलाश की जा रही है, जिन्होंने आतंकियों तक तकनीकी संसाधन और अन्य मदद पहुंचाई।
एजेंसियों को फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड, संदेश या इंटरनेट गतिविधि नहीं मिली है। सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की बजाय लंबी दूरी तक काम करने वाली रेडियो संचार तकनीक का इस्तेमाल किया हो सकता है, जिससे उनकी गतिविधियां सामान्य डिजिटल निगरानी से बची रहीं।
हमले को अंजाम देने वालों तक सीमित नहीं
जांच अब केवल हमले को अंजाम देने वालों तक सीमित नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां उन सभी कड़ियों को खंगाल रही हैं, जिनके माध्यम से आतंकियों को संसाधन, उपकरण और अन्य सहयोग उपलब्ध कराया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस दिशा में मिले नए सुराग पूरे षड्यंत्र की परतें खोलने में मदद कर सकते हैं।