
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके हाथ में मौजूद भारतीय पासपोर्ट इस बात की गारंटी है कि आप भारत के नागरिक हैं। विदेश मंत्रालय के एक हालिया स्पष्टीकरण ने इस पर 'नो' कहकर पूरे देश को चौंका दिया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट बुनियादी रूप से महज एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है और इसे नागरिकता का अंतिम या निर्णायक कानूनी सबूत नहीं माना जा सकता।
मंत्रालय ने बुधवार को पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को सुगम बनाना और विदेशों में भारतीय राष्ट्रीयता को दर्शाना है, लेकिन कानूनी तौर पर यह नागरिकता का अंतिम दस्तावेज नहीं है।
सरकार के इस एक बयान ने सोशल मीडिया से लेकर देश के सियासी गलियारों तक एक बहुत बड़ी कानूनी और राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसने हर आम और खास को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर भारत में नागरिकता का असली पैमाना क्या है? इस मुद्दे पर मशहूर संगीतकार जावेद अख्तर सहित विपक्ष के कई नेताओं और आम जनता ने सरकार से तीखे सवाल पूछना शुरू कर दिए हैं कि यदि यह सब नागरिकता के सबूत नहीं हैं, तो आम आदमी अपनी नागरिकता प्रमाणित करने के लिए कहां जाए?
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, देश में ऐसा कोई एक इकलौता डिजिटल कार्ड या सरकारी कागज नहीं है जो अकेले ही आपकी नागरिकता को पूरी तरह सिद्ध कर दे। भारत में नागरिकता किसी एक पहचान पत्र से नहीं, बल्कि आपके जन्म के समय, स्थान और माता-पिता के कानूनी दस्तावेजों की पूरी कड़ी को मिलाकर साबित की जाती है।
अदालतों और सरकार के मुताबिक, पहचान पत्र केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए होते हैं। उदाहरण के लिए, पैन कार्ड केवल टैक्स के लिए और ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने के लिए है। वहीं अदालती फैसलों के अनुसार, पहचान और पते के अन्य दस्तावेज भी नागरिकता के निर्णायक सबूत नहीं माने जाते।
इस कानूनी पहेली में आपका जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल के पुराने रिकॉर्ड्स सबसे मजबूत बुनियाद माने जाते हैं। नागरिकता की प्रामाणिकता जांचने के लिए सरकारी अधिकारी स्थिति के अनुसार कई दस्तावेजों को मिलाकर देखते हैं, जिनमें प्रमुख हैं।
इसके अलावा कोई भी ऐसा सरकारी कागज जिसमें आपका जन्म स्थान और तारीख दर्ज हो। इसके साथ ही आपको ध्यान इस बात पर भी देना है कि इनमें से कोई भी एक दस्तावेज अकेले नागरिकता साबित करने के लिए काफी नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इस जांच से संबंधित अधिकारी स्थिति के हिसाब से इन सभी कागजातों को मिलाकर देखते हैं।