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UGC का इक्विटी नियम क्या है? जिसके खिलाफ जंतर-मंतर पर हो रहा प्रदर्शन, आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की उठी मांग

UGC Equity Rules 2026: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को UGC के 2026 इक्विटी नियमों और आरक्षण व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन हुआ।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 22 Aug 2026 05:16:41 PM (IST)Updated Date: Sat, 22 Aug 2026 05:16:41 PM (IST)
UGC का इक्विटी नियम क्या है? जिसके खिलाफ जंतर-मंतर पर हो रहा प्रदर्शन, आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की उठी मांग
UGC इक्विटी नियमों के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन (AI Generated Image)

HighLights

  1. प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग रखी
  2. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाई
  3. केंद्र सरकार नियमों की दोबारा समीक्षा कर रही है

नईदुनिया प्रतिनिधि, नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar Protest) पर शुक्रवार को ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC Equity Rules 2026) के नए इक्विटी नियमों का विरोध करते हुए इन्हें वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग की। प्रदर्शन के दौरान जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा और सरकारी सहायता का आधार आर्थिक स्थिति को बनाने की मांग भी उठाई गई।

देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लागू किए गए UGC के समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को भेदभाव और उत्पीड़न से सुरक्षा देना है। हालांकि, कुछ प्रावधानों को लेकर विरोध सामने आया है।


क्या हैं UGC के इक्विटी नियम

UGC ने 13 जनवरी 2026 से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 लागू किए थे। इन नियमों ने वर्ष 2012 में जारी पुराने दिशा-निर्देशों की जगह ली थी। इनका प्रमुख उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न को रोकना है।

नए नियमों के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में समानता समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है। समिति में OBC, महिला, SC, ST और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना है। समिति को प्रत्येक छह महीने में अपनी रिपोर्ट UGC को भेजनी होगी।

इसके अलावा OBC छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जातिगत भेदभाव या उत्पीड़न से जुड़ी शिकायत सक्षम अधिकारी के समक्ष दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। संस्थानों में SC, ST और OBC छात्रों के लिए समान अवसर सेल बनाना भी अनिवार्य किया गया है।

किन प्रावधानों पर है विवाद

नियम लागू होने के बाद इनके कुछ प्रावधानों को लेकर विरोध शुरू हुआ। विरोध करने वालों का कहना है कि अंतिम नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा के तहत SC, ST और OBC को शामिल किया गया, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को समान दायरे में सुरक्षा नहीं दी गई।

इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नियमों को चुनौती दी गई। इसके अलावा शुरुआती ड्राफ्ट में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान को लेकर भी विवाद हुआ था। बताया गया कि अंतिम नियमों में यह प्रावधान हटा दिया गया, जिसके बाद इनके संभावित गलत इस्तेमाल को लेकर आशंकाएं जताई गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर लगाई रोक

विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में 2026 के नियमों के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। शुरुआती सुनवाई के दौरान अदालत ने कुछ पहलुओं को स्पष्ट नहीं होने और इनके गलत इस्तेमाल की संभावना पर सवाल उठाए थे।

इसके बाद वर्ष 2012 के पुराने नियम फिर लागू हो गए। अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह 2026 के नियमों की दोबारा समीक्षा कर रही है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है।

जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था बदलने की मांग

शुक्रवार के प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा की मांग उठाई। उन्होंने सरकारी सहायता के लिए आर्थिक स्थिति को भी आधार बनाने की बात कही। कुछ प्रदर्शनकारियों ने क्रीमी लेयर व्यवस्था लागू करने तथा SC, ST और OBC से जुड़ी नीतियों में बदलाव की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। प्रदर्शन में राजस्थान की जनरल सेना, चाणक्य सेना और करणी सेना से जुड़े लोगों के शामिल होने की बात कही गई।