'विधवाओं का गांव' बन चुकी है यह जगह, जानें घरों में क्यों जिंदा नहीं बच रहे पुरुष?
पंजाब इस जिले के कुछ गांव, 'विधवाओं का गांव' बन चुके हैं। कई घरों में पुरुषों की संख्या बेहद कम रह गई है। आइए जानते हैं इसके पीछे आखिर क्या कारण है? ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 03 Apr 2026 03:52:05 PM (IST)Updated Date: Fri, 03 Apr 2026 03:52:05 PM (IST)
'विधवाओं का गांव' बन चुकी है यह जगह।HighLights
- पंजाब के कुख्यात ‘कैंसर बेल्ट’
- हजारों मौतें, हर घर में मरीज
- दूषित पानी बना बड़ा कारण
नईदुनिया डेस्क, बठिंडा। पंजाब का मालवा क्षेत्र इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। बठिंडा जिले के कई गांवों की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें अब ‘विधवाओं का गांव’ कहा जाने लगा है। यहां कैंसर ने इस कदर कहर बरपाया है कि कई घरों में पुरुषों की संख्या बेहद कम रह गई है और कई गलियां ‘विधवाओं की गली’ के नाम से जानी जाती हैं।
पंजाब के कुख्यात ‘कैंसर बेल्ट’
यह समस्या केवल जज्जल गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि रामा मंडी, चट्ठेवाला और गियाना जैसे गांव भी इसकी चपेट में हैं। ये सभी इलाके पंजाब के कुख्यात ‘कैंसर बेल्ट’ का हिस्सा माने जाते हैं।
हजारों मौतें, हर घर में मरीज
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते दो दशकों में इन गांवों में हजारों लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। स्थिति यह है कि लगभग हर घर में एक या उससे अधिक कैंसर मरीज मौजूद हैं।
दूषित पानी बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गंभीर स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां का प्रदूषित पानी है। पानी में आर्सेनिक, सेलेनियम और यूरेनियम जैसे खतरनाक तत्व उच्च स्तर पर पाए गए हैं। इसके अलावा, रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और फसलें भी जहरीली हो चुकी हैं।
औद्योगिक प्रदूषण ने बढ़ाई समस्या
क्षेत्र में मौजूद रिफाइनरी प्लांट से निकलने वाला कचरा भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके साथ ही तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब के सेवन ने कैंसर के खतरे को और बढ़ा दिया है।
सरकार और स्वास्थ्य सुविधाएं
हालांकि, हालात को देखते हुए सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया है। बठिंडा में अब कई कैंसर अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनमें एम्स बठिंडा प्रमुख है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत मरीजों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।
जागरूकता और नियंत्रण की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए साफ पानी की उपलब्धता, कीटनाशकों पर नियंत्रण और लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी है। फिलहाल इलाज की सुविधाएं बढ़ने से राहत जरूर मिली है, लेकिन यह संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।