
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI New Rules) ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD rules Change) और अन्य जमा योजनाओं पर ब्याज दरों से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय बैंक ने 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक- डिपॉजिट पर ब्याज दर) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026' जारी किया। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और सभी बैंकों में एकरूपता सुनिश्चित करना है।
RBI के नए निर्देशों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या आवर्ती जमा (RD) की राशि 3 करोड़ रुपये से कम है, तो एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाएं एक ही दिन, समान अवधि और समान राशि पर अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी।
अब तक कुछ बैंक प्रतिस्पर्धा के चलते अपनी अलग-अलग शाखाओं में एक जैसी जमा पर अलग-अलग ब्याज दरें देते थे। नए नियम के बाद इस व्यवस्था पर रोक लग जाएगी। यह निर्देश स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों सहित संबंधित बैंकिंग संस्थानों पर लागू होगा।
RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे हर दिन सुबह 10 बजे अपनी जमा दरें (Deposit Rates) आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करें। इससे ग्राहकों को वास्तविक ब्याज दरों की जानकारी आसानी से मिलेगी और किसी भी स्तर पर ब्याज दरों को लेकर मोलभाव या अलग-अलग ग्राहकों को अलग दरें देने की संभावना कम होगी। बैंक को वही ब्याज दर लागू करनी होगी, जो उसकी वेबसाइट पर प्रकाशित होगी।
रिजर्व बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एकमुश्त FD को 'बल्क डिपॉजिट' की श्रेणी में रखा है। इस तरह की जमा राशि आमतौर पर कंपनियां, बड़े कारोबारी, ट्रस्ट और उच्च नेटवर्थ वाले ग्राहक करते हैं।
पहले ऐसे ग्राहकों के साथ ब्याज दरें निजी बातचीत के आधार पर तय की जाती थीं। कई मामलों में अलग-अलग ग्राहकों को अलग-अलग दरें मिलती थीं। अब नए नियमों के तहत कमर्शियल और सहकारी बैंकों को बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें भी हर दिन सुबह 10 बजे सार्वजनिक करनी होंगी। इससे बड़े जमाकर्ताओं के लिए भी पारदर्शी और समान व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।