'केवल माफी मांग लेने से मामला खत्म नहीं होगा'..किताब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने NCERT को लगाई फटकार
कक्षा 8 की एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यपुस्तक में शामिल अध्याय 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 26 Feb 2026 02:33:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 26 Feb 2026 02:36:45 PM (IST)
किताब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने NCERT को लगाई फटकारHighLights
- मामला न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला प्रतीत होता है
- शीर्ष अदालत ने कहा, पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए
- एनसीईआरटी ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी
डिजिटल डेस्क। कक्षा 8 की एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यपुस्तक में शामिल अध्याय 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जे. बागची और जस्टिस पंचोली की पीठ ने एनसीईआरटी निदेशक और शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांग लेने से मामला समाप्त नहीं होगा। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में वे तब तक संतुष्ट नहीं होंगे, जब तक पूरे मामले की गहराई से जांच नहीं हो जाती।
गौरतलब है कि अदालत की नाराजगी के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT)ने संबंधित पुस्तक को वापस लेने का निर्णय लिया और बिना शर्त माफी भी मांगी।
बिना शर्त माफी मांगते हैंः एनसीईआरटी
एनसीईआरटी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा, हम बिना शर्त माफी मांगते हैं। स्कूल शिक्षा सचिव भी यहां उपस्थित हैं। हालांकि, इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जारी नोटिस में माफी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि जिस प्रकार इस प्रकाशन को आगे बढ़ाया गया, उससे गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। अदालत ने संकेत दिया कि मामले के पीछे संभावित साजिश की भी जांच की आवश्यकता हो सकती है।
न्यायपालिका की छवि को नुकसान
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने आश्वस्त किया कि जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बाजार में आई 32 पुस्तकों को वापस लिया जा रहा है और संबंधित अध्याय की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि अध्याय में लंबित मामलों (pendency) से जुड़ा एक भाग था, जिसका शीर्षक 'Justice Delayed is Justice Denied' है, और इस विषय को संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने टिप्पणी की कि इस प्रकाशन से न्यायपालिका की छवि को गंभीर क्षति पहुंची है और पुस्तक अभी भी बाजार में उपलब्ध है।