
डिजिटल डेस्क। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे देश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों में खाली पड़े 1.83 लाख से अधिक पदों को भरने की आधिकारिक कवायद शुरू हो गई है। हाल ही में एक संसदीय पैनल की बैठक के दौरान शीर्ष केंद्रीय अधिकारियों ने इस बड़े भर्ती अभियान की जानकारी साझा की है।
देश में हाल ही में हुए पेपर लीक के मामलों को देखते हुए इस बैठक में परीक्षाओं की सुरक्षा और शुचिता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सांसदों ने आगामी भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की मांग की। पैनल के सदस्यों ने सुझाव दिया कि पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षाओं की जगह कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) को व्यापक रूप से अपनाया जाना चाहिए, ताकि सुरक्षा को मजबूत किया जा सके और लीक की गुंजाइश खत्म हो।
इस मेगा रिक्रूटमेंट ड्राइव के तहत सबसे बड़ी संख्या भारतीय रेलवे में है, जहां रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के माध्यम से सबसे ज्यादा 1,08,129 पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। इसके बाद कर्मचारी चयन आयोग (SSC) का नंबर है, जो विभिन्न विभागों के लिए 65,331 पदों पर भर्तियां कर रहा है। वहीं, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के जरिए सिविल सर्विसेज और अन्य उच्च स्तरीय श्रेणियों के 10,135 पदों को भरा जा रहा है।
| विभाग / एजेंसी | खाली पदों की संख्या | भर्ती का माध्यम |
| रेलवे (RRBs) | 1,08,129 | रेलवे भर्ती बोर्ड |
| SSC | 65,331 | SSC परीक्षाएं |
| कुल केंद्रीय पद | 1.83 लाख+ | विभिन्न एजेंसियां |
| UPSC | 10,135 | सिविल सर्विस भर्ती बोर्ड |
संसदीय स्थायी समिति के सामने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और UPSC के अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के रोडमैप पर चर्चा की। इस दौरान भाजपा सांसद बृजलाल सहित कुछ सदस्यों ने प्रस्ताव रखा कि UPSC को परीक्षा संपन्न होते ही 'फाइनल आंसर की' जारी कर देनी चाहिए, ताकि उम्मीदवारों को नतीजों का लंबा इंतजार न करना पड़े।
हालांकि, UPSC के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई। अधिकारियों का तर्क था कि परिणाम से पहले आंसर की जारी करने से अदालती मुकदमों (लीटीगेशन) की संख्या बढ़ सकती है, जिससे सिविल सेवा परीक्षा का पहले से तय और कड़ा शेड्यूल प्रभावित हो जाएगा।
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संसदीय पैनल ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कई बार परीक्षा के आयोजन और अंतिम नियुक्ति के बीच बहुत लंबा समय लग जाता है, जिससे अभ्यर्थियों को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। समिति ने सभी प्रमुख भर्ती एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और रिजल्ट जारी करने में होने वाली देरी को जल्द से जल्द कम करने के निर्देश दिए हैं।