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फर्जी बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट का खेल खत्म, संसद में पास हुआ नया कानून, बदल गए रजिस्ट्रेशन के ये बड़े नियम

राज्यसभा से भी मंगलवार को जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 04 Aug 2026 06:29:17 PM (IST)Updated Date: Tue, 04 Aug 2026 06:29:17 PM (IST)
फर्जी बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट का खेल खत्म, संसद में पास हुआ नया कानून, बदल गए रजिस्ट्रेशन के ये बड़े नियम
संसद से पास हुआ जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल। (AI Generated Image)

HighLights

  1. संसद से पास हुआ जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल
  2. पासपोर्ट से लेकर स्कूल एडमिशन तक फर्जीवाड़े पर नकेल
  3. जानें क्यों बदला गया 1969 का जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून

डिजिटल डेस्क। केंद्र सरकार ने देश में जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सख्त और आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्यसभा ने मंगलवार को जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इससे पहले यह अहम विधेयक लोकसभा से भी बिना किसी बहस के पारित हो चुका था।

जुलाई 2026 के अंत में संसद में पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य 1969 के मूल अधिनियम में समय के अनुकूल बदलाव करना है, ताकि फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके और समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जा सके।


अब 2 साल से अधिक की देरी पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश होगा जरूरी

  • नए संशोधन के तहत जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में होने वाली देरी के नियमों को काफी कड़ा कर दिया गया है।
  • पुराना नियम: पहले यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से अधिक समय तक नहीं कराया जाता था, तो इसके लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अनुमति पर्याप्त होती थी।
  • नया नियम: अब यदि रजिस्ट्रेशन में 2 वर्ष से अधिक का विलंब होता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आधिकारिक आदेश अनिवार्य होगा।
  • 2 साल तक की देरी: दो साल तक के विलंब वाले मामलों में पुरानी प्रक्रिया के तहत ही निर्धारित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मंजूरी दी जा सकेगी।

फर्जी बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट पर लगेगी लगाम

सरकार का मानना है कि वर्तमान दौर में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सिर्फ एक सामान्य कागज नहीं रह गए हैं। स्कूल में दाखिला लेने, पासपोर्ट बनवाने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और संपत्ति के विवाद निपटाने में इन दस्तावेजों की सबसे अहम भूमिका होती है।

कई बार लोग जन्म तिथि में हेरफेर करने या संपत्ति के दावों को प्रभावित करने के लिए वर्षों बाद फर्जी बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट बनवा लेते थे। नए नियमों से इस तरह की धोखाधड़ी और फर्जी प्रमाण पत्रों के खेल पर पूरी तरह रोक लगेगी।

कानूनी शब्दावली में भी किया गया बदलाव

यह संशोधन बिल कानूनी परिभाषाओं को भी नए कानूनों के अनुरूप अपडेट करता है। इसमें पुरानी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC, 1973) के संदर्भों को हटाकर नए लागू हुए 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' के अनुसार "एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट" जैसे शब्दों को परिभाषित किया गया है।

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कब से लागू होंगे नए नियम?

यह नया कानून 'जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन (संशोधन) एक्ट, 2026' कहलाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी मिलने और संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद, अब केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी करने की तारीख से यह देशभर में प्रभावी हो जाएगा।