
डिजिटल डेस्क। केंद्र सरकार ने देश में जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सख्त और आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्यसभा ने मंगलवार को जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इससे पहले यह अहम विधेयक लोकसभा से भी बिना किसी बहस के पारित हो चुका था।
जुलाई 2026 के अंत में संसद में पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य 1969 के मूल अधिनियम में समय के अनुकूल बदलाव करना है, ताकि फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके और समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जा सके।
सरकार का मानना है कि वर्तमान दौर में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सिर्फ एक सामान्य कागज नहीं रह गए हैं। स्कूल में दाखिला लेने, पासपोर्ट बनवाने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और संपत्ति के विवाद निपटाने में इन दस्तावेजों की सबसे अहम भूमिका होती है।
कई बार लोग जन्म तिथि में हेरफेर करने या संपत्ति के दावों को प्रभावित करने के लिए वर्षों बाद फर्जी बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट बनवा लेते थे। नए नियमों से इस तरह की धोखाधड़ी और फर्जी प्रमाण पत्रों के खेल पर पूरी तरह रोक लगेगी।
यह संशोधन बिल कानूनी परिभाषाओं को भी नए कानूनों के अनुरूप अपडेट करता है। इसमें पुरानी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC, 1973) के संदर्भों को हटाकर नए लागू हुए 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' के अनुसार "एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट" जैसे शब्दों को परिभाषित किया गया है।
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यह नया कानून 'जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन (संशोधन) एक्ट, 2026' कहलाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी मिलने और संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद, अब केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी करने की तारीख से यह देशभर में प्रभावी हो जाएगा।