

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। कुछ राज्यों ने इसे लागू कर दिया है, जबकि कई राज्य कानून बनाने या उसकी तैयारी के अलग-अलग चरणों में हैं।
संविधान के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) के अनुच्छेद 44 में राज्य से सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है। ऐसे में स्वतंत्रता के 79 साल से अधिक समय बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या देश के सभी राज्यों में किसी रूप में समान नागरिक कानून लागू हो सकता है।

फिलहाल उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। वहीं गोवा में पहले से ही एक समान सिविल कानून लागू है। गुजरात और मध्य प्रदेश UCC से जुड़े विधेयक पारित कर चुके हैं, जबकि राजस्थान कानून लाने की तैयारी में है। पश्चिम बंगाल में फिलहाल इसे लेकर राजनीतिक बहस जारी है। आइए जानते हैं कि अलग-अलग राज्यों में UCC किस चरण में है और उनके कानूनों या प्रस्तावों में क्या खास है।
उत्तराखंड 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया। राज्य सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और अन्य पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
संविधान के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। उत्तराखंड में UCC के तहत सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का भी प्रावधान किया गया है।
कानून में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए समान नियम तय किए गए हैं। बहुविवाह (Polygamy) पर रोक की बात भी इसमें शामिल है। विभिन्न धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) के स्थान पर एक समान नागरिक व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया गया है। राज्य सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक सुरक्षा मिलेगी तथा पारिवारिक विवादों में समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।
मध्य प्रदेश ने भी UCC लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। राज्य विधानसभा से संबंधित विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन इसके प्रभावी होने से पहले राज्यपाल की मंजूरी और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी है।
सरकार का कहना है कि UCC लागू होने के बाद व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नागरिक संहिता प्रभावी होगी। प्रस्तावित व्यवस्था में विवाह और तलाक के लिए समान कानूनी नियमों के साथ उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े विवादों के लिए भी समान प्रावधान रखे गए हैं। कानून को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक नियम तैयार किए जाएंगे। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही इसका नागरिकों पर प्रभाव पड़ेगा।
राजस्थान सरकार भी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और विधानसभा में विधेयक लाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि फिलहाल राजस्थान में UCC लागू नहीं हुआ है और विधायी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
प्रस्तावित ड्राफ्ट में सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य करने की बात शामिल है। विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए समान नियम प्रस्तावित हैं। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कानूनी प्रावधानों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा पारिवारिक विवादों के लिए समान कानूनी प्रक्रिया का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि अंतिम कानून तैयार करने से पहले विभिन्न पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे।
गोवा में भारत का सबसे पुराना कॉमन सिविल कोड लागू है। पुर्तगाली शासन के दौरान लागू किया गया Portuguese Civil Code, 1867 आज भी संशोधित रूप में प्रभावी है। इसी कारण गोवा को भारत में समान नागरिक कानून के सबसे पुराने उदाहरण के तौर पर देखा जाता है।
गोवा के कॉमन सिविल कोड में अधिकांश नागरिकों के लिए समान सिविल कानून की व्यवस्था है। विवाह और संपत्ति से जुड़े नियम काफी हद तक समान हैं। पति-पत्नी की संयुक्त संपत्ति यानी Community Property की व्यवस्था भी इसमें शामिल है। कुछ धार्मिक समुदायों को विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान है। राष्ट्रीय स्तर पर UCC को लेकर होने वाली बहस में गोवा मॉडल को अक्सर उदाहरण के तौर पर पेश किया जाता है।
गुजरात विधानसभा UCC विधेयक को मंजूरी दे चुकी है। हालांकि राज्य में कानून अभी लागू नहीं हुआ है। सरकार आवश्यक नियम, प्रशासनिक ढांचा और डिजिटल व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया में है। राज्य सरकार का कहना है कि कानून लागू करने से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
गुजरात में भी उत्तराखंड मॉडल से कई प्रावधान अपनाए गए हैं। विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए समान नियम प्रस्तावित हैं। कानून लागू होने से पहले विस्तृत नियम बनाए जाएंगे और ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था विकसित की जा रही है।
पश्चिम बंगाल में UCC को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। हालांकि अभी तक UCC से संबंधित कोई विधेयक विधानसभा में पेश नहीं किया गया है।
राज्य सरकार ने इसे लागू करने की दिशा में कोई औपचारिक कदम भी नहीं उठाया है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में इस विषय पर कोई विधायी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और मामला मुख्य रूप से राजनीतिक बहस तक सीमित है।
उत्तराखंड में UCC लागू है और वह ऐसा करने वाला पहला राज्य है। गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड पर आधारित समान सिविल व्यवस्था पहले से लागू है। गुजरात में विधेयक पारित हो चुका है और नियम बनने के बाद इसे लागू किया जाना है। मध्य प्रदेश में भी विधेयक पारित है, लेकिन राज्यपाल की मंजूरी और नियमों का इंतजार है। राजस्थान में ड्राफ्ट तैयार है और विधानसभा में बिल लाने की तैयारी है। वहीं पश्चिम बंगाल में अभी केवल राजनीतिक चर्चा चल रही है।
अलग-अलग राज्यों की स्थिति से स्पष्ट है कि समान नागरिक संहिता को लेकर देश में एक जैसी प्रक्रिया नहीं चल रही है। उत्तराखंड में यह लागू हो चुका है, गोवा में पहले से अलग मॉडल मौजूद है, जबकि गुजरात और मध्य प्रदेश विधायी प्रक्रिया के बाद के चरण में हैं। राजस्थान कानून बनाने की तैयारी में है और पश्चिम बंगाल में फिलहाल राजनीतिक विमर्श जारी है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य राज्य उत्तराखंड की राह अपनाते हैं या समान नागरिक संहिता के लिए अपनी अलग कानूनी व्यवस्था तैयार करते हैं।