'आसमान में हम सिर्फ उड़ते नहीं, जानें बचाते हैं', IAF के जांबाजों ने देश के युवाओं को दिया जोश से भरा संदेश
भारतीय वायुसेना के 'आईएएफ मंत्र' कार्यक्रम में तीन युवा अधिकारियों ने फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में अपने रोमांचक अनुभवों और प्रशिक्षण क...और पढ़ें
By Amit SinghEdited By: Amit Singh
Publish Date: Fri, 14 Aug 2026 04:49:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2026 04:49:04 PM (IST)
IAF के जांबाजों ने देश के युवाओं को दिया जोश से भरा संदेशडिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आसमान का सीना चीरकर देश की सीमाओं की रक्षा करना और हर आपात स्थिति में देवदूत बनकर पहुँचना भारतीय वायुसेना (IAF) की पहचान है। वायुसेना के एक खास पॉडकास्ट एपिसोड में फ्लाइंग ब्रांच के तीन जांबाज युवा अधिकारियों ने अपनी इस रोमांचक दुनिया के अनुभव साझा किए। फाइटर स्ट्रीम से मिग-29 की पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुण्या नंजप्पा, ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम से सी-130जे के पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट देसाई और हेलीकॉप्टर बेड़े से एएलएच ध्रुव के पायलट विंग कमांडर हिमांशु शर्मा ने वायुसेना की कठिन ट्रेनिंग, आसमान में लिए जाने वाले त्वरित फैसलों और रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशंस की जीवंत तस्वीरें पेश कीं।
उड़ान का सपना: एनसीसी के एयर शो से लेकर शिक्षक की प्रेरणा तक
वायुसेना में शामिल होने की हर अधिकारी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। विंग कमांडर हिमांशु शर्मा के मन में नीली वर्दी पहनने का सपना स्कूल के दिनों में उनकी एक शिक्षिका ने जगाया था, जिन्होंने उन्हें एनडीए (NDA) की जानकारी दी थी। वहीं, फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुण्या ने मैसूर में एक एयर शो देखकर ठान लिया था कि उन्हें लड़ाकू विमान ही उड़ाना है। एनसीसी एयर विंग के जरिए उन्होंने पहली बार उड़ान का अनुभव लिया और अपने लक्ष्य को हासिल किया। इसके विपरीत, फ्लाइट लेफ्टिनेंट देसाई ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई और कॉर्पोरेट जगत के एक आरामदायक करियर को छोड़कर एएफकैट (AFCAT) परीक्षा के माध्यम से आसमान की ऊंचाइयों को चुना।
कठोर चयन प्रक्रिया और एयर फोर्स एकेडमी (AFA) की ट्रेनिंग
वायुसेना का पायलट बनना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है। इसके लिए अभ्यर्थियों को 'कम्प्यूटराइज्ड पायलट सिलेक्शन सिस्टम' (CPSS) से गुजरना पड़ता है, जिसे जीवन में केवल एक ही बार दिया जा सकता है। एयर फोर्स एकेडमी में कैडेट्स को समय के पाबंद और हर परिस्थिति में शांत रहकर निर्णय लेने के लिए ढाला जाता है। यहाँ पिलाटस और किरण जैसे विमानों पर बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद कैडेट्स की मेरिट, उनकी रुचि और वायुसेना की तत्कालीन आवश्यकता के आधार पर उन्हें फाइटर, ट्रांसपोर्ट या हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में भेजा जाता है।
फाइटर स्ट्रीम: ध्वनि से तेज रफ्तार और 9G का जानलेवा दबाव
लड़ाकू विमान उड़ाना असीम साहस और मानसिक एकाग्रता का काम है। फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुण्या नंजप्पा बताती हैं कि मिग-29 जैसे फाइटर जेट्स ध्वनि से भी दोगुनी गति से उड़ान भरते हैं। हवाई युद्ध (डॉगफाइट) और तीखे मोड़ों के दौरान पायलट के शरीर पर 9-जी (गुरुत्वाकर्षण से 9 गुना अधिक) तक का भारी दबाव पड़ता है। इस जानलेवा दबाव को सहने और बेहोश होने से बचने के लिए पायलटों को बेंगलुरु स्थित विशेष 'ऑप्ट्राम' (OpTraM) सेंटर में 9-जी सेंट्रीफ्यूज ट्रेनिंग दी जाती है। आसमान में लाइव मिसाइल दागने और दुश्मन को मार गिराने का अचूक अभ्यास भी इनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा है।
ट्रांसपोर्ट फ्लीट: भारी-भरकम सी-130जे और 'लाइव ऑर्गन' का परिवहन
वायुसेना के ट्रांसपोर्ट विमान संकट के समय देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट देसाई बताते हैं कि उनका सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान 30 टन से ज्यादा ईंधन के साथ लगातार 13 घंटे तक उड़ान भर सकता है। यह विशाल विमान लद्दाख के कच्चे रनवे (ALG) से लेकर देश के नेशनल हाईवेज (ELF) तक पर रात के घने अंधेरे में नाइट विजन गॉगल्स के सहारे आसानी से उतर सकता है। उन्होंने एक रात का रोमांचक वाकया सुनाया जब उनके क्रू ने रात दो बजे उत्तर भारत से एक 'लाइव ऑर्गन' (जीवित अंग) को दिल्ली के एक अस्पताल तक पहुँचाया, जिससे एक मरीज की जान बचाई जा सकी।
हेलीकॉप्टर पायलट्स: हवा में स्थिर रहने की कला और देवदूत बनकर बचाई जान
हेलीकॉप्टर पायलट्स का काम सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि इन्हें बिना किसी रनवे के जंगलों, पहाड़ों और बाढ़ ग्रस्त इलाकों में उतरना होता है। विंग कमांडर हिमांशु शर्मा ने हेलीकॉप्टर को हवा में एक ही जगह स्थिर रखने की कला (होवरिंग) को अलौकिक बताया। उन्होंने मनाली में भारी बर्फबारी का जिक्र किया, जब उनकी टीम ने 13 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर माइनस तापमान में 500 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित निकाला था। नर्मदा की बाढ़ के दौरान भी हेलीकॉप्टर क्रू ने दलदली जमीन पर हाफ-लैंडिंग कराकर कई ग्रामीणों की जान बचाई थी।
सुरक्षा के कड़े मानक और नई पीढ़ी के लिए संदेश
भारतीय वायुसेना में मिशन की सफलता के साथ-साथ सुरक्षा के मानकों (ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट) से कोई समझौता नहीं किया जाता। हर उड़ान से पहले मौसम और संभावित खतरों की घंटों ब्रीफिंग होती है और उतरने के बाद उसका सटीक विश्लेषण (डी-ब्रीफिंग) किया जाता है। तीनों युवा अधिकारियों ने देश के युवाओं को संदेश दिया कि वे सेना में जाने के लिए सही माध्यमों (जैसे दिशा पोर्टल) से जानकारी जुटाएं, अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें और कड़ी मेहनत करें। एक बार वायुसेना का हिस्सा बनने के बाद जीवन को देखने का नजरिया हमेशा के लिए सकारात्मक और निडर हो जाता है।