
डिजिटल डेस्क। इस साल मार्च का महीना अपने मिजाज से सबको चौंका रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में अनचाही बारिश ने मौसम का गणित बदल दिया है। सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने समय से पहले दस्तक दे रही गर्मी पर न केवल अंकुश लगाया है, बल्कि उत्तर भारत को दोबारा स्वेटर निकालने पर मजबूर कर दिया है। दिल्ली में 19 मार्च का दिन सीजन का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया, जिसने पिछले 6 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
उत्तराखंड के पंचबदरी और पंचकेदार (गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ, केदारनाथ) सहित हेमकुण्ड साहिब में बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है। हिमाचल के मनाली और लाहुल-स्पीति में निरंतर हिमपात से जनजीवन प्रभावित है।
जम्मू-कश्मीर: बर्फबारी और भूस्खलन के कारण श्रीनगर-लेह मार्ग और मुगल रोड बंद कर दिए गए हैं। यहाँ दिन का तापमान सामान्य से 6°C से 10°C नीचे लुढ़क गया है।
उत्तर भारत: यूपी, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में झोंकेदार हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि ने पारे में भारी गिरावट दर्ज की है।
दिल्ली में गुरुवार का दिन असामान्य रूप से ठंडा रहा। यहां अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5°C कम यानी 26.8°C रिकॉर्ड किया गया। नोएडा और गाजियाबाद में बुधवार शाम से शुरू हुई तेज हवाओं और बूंदाबांदी ने उमस को पूरी तरह खत्म कर दिया है। राजस्थान के सीकर और जैसलमेर में लगातार दूसरे दिन ओले गिरे, जिससे फसलों को भी नुकसान की आशंका है।
मार्च का महीना अब सीधे गर्मियों की शुरुआत के बजाय एक 'मिश्रित मौसम' (Mixed Weather) का दौर बनता जा रहा है। इसके पीछे तीन मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं...
पश्चिमी विक्षोभ की 'बैक-टू-बैक' एंट्री: भूमध्य सागर से उठने वाली ठंडी हवाएं (Western Disturbance) इस बार लगातार सक्रिय हैं। मौसम वैज्ञानिक एच.एस. पांडे के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दो विक्षोभों के सक्रिय होने से मैदानी इलाकों में नमी और बादल छाए हुए हैं।
नमी और तापमान का टकराव: मार्च में जमीन गर्म होने लगती है, लेकिन पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाएं जब इस गर्मी से टकराती हैं, तो 'थंडरस्टॉर्म' की स्थिति बनती है। इससे अचानक तेज आंधी और ओलावृष्टि होती है।
प्री-समर ट्रांजेक्शन फेज: सर्दी के जाने और गर्मी के आने के बीच का यह संक्रमण काल (Transition Period) वायुमंडलीय दबाव में अस्थिरता पैदा करता है, जिससे मौसम बार-बार करवट बदलता है।
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