West Asia Crisis: तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत, 20 हजार टन LPG लेकर गुजरात पहुंचा 'सिमी' जहाज
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच 20 हजार टन एलपीजी लेकर 'सिमी' कैरियर कांडला के दीनदयाल पोर्ट पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया है। इस जहाज ने 13 मई को ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 17 May 2026 10:52:24 AM (IST)Updated Date: Sun, 17 May 2026 10:52:24 AM (IST)
20 हजार टन LPG लेकर गुजरात पहुंचा 'सिमी' जहाजHighLights
- पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत को राहत मिली
- 20 हजार टन एलपीजी लेकर गुजरात पहुंचा जहाज
- इस जहाज ने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट को पार किया था
डिजिटल डेस्क। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। 20 हजार टन एलपीजी (LPG) लेकर 'सिमी' कैरियर मालवाहक जहाज गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल पोर्ट पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया है। इस टैंकर ने 13 मई को सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को सफलतापूर्वक पार किया था। इस जहाज पर कुल 21 क्रू सदस्य सवार हैं, जिनमें 8 यूक्रेनी और 13 फिलिपीनी नागरिक शामिल हैं। मौजूदा सुरक्षा निगरानी अभियानों के तहत होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार करने वाला 'सिमी' 11वां एलपीजी टैंकर बन गया है।
अधिकारियों के अनुसार, युद्ध क्षेत्र के इतने करीब होने के बावजूद इस जहाज की सुरक्षित वापसी भारत सरकार के विभिन्न विभागों के बेहतरीन समन्वय से संभव हो सकी। महानिदेशक जहाजरानी (DG Shipping), विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच बने करीबी तालमेल के कारण ही टैंकर को अचूक सुरक्षा प्रदान की जा सकी।
घट रहा है भारत का कच्चा तेल भंडार
यह जहाज ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भारी दबाव है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म 'Kpler' के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के कारण पिछले कुछ महीनों में भारत का कुल कच्चा तेल भंडार फरवरी के अंत में दर्ज 107 मिलियन बैरल से 15% घटकर अब केवल 91 मिलियन बैरल रह गया है। इस भंडार में रिफाइनरी होल्डिंग्स और वाणिज्यिक स्टॉक शामिल हैं।
हालांकि, आयात में इस कमी के बावजूद भारतीय रिफाइनरों ने कच्चे तेल की प्रोसेसिंग और उत्पादन का काम बिना किसी बड़ी कटौती के अब तक स्थिर रखा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आपूर्ति में बाधाएं लंबे समय तक जारी रहीं, तो रिफाइनरियों को विवश होकर अपना परिचालन और तेल प्रोसेसिंग का स्तर कम करना पड़ेगा।