Kharmas 2026: 15 मार्च से मांगलिक कार्यों पर लगेगा 'ब्रेक', भगवान सूर्य के मीन राशि में गोचर करते ही शुरू होगा खरमास
भगवान सूर्य देव 14 मार्च शनिवार की मध्य रात्रि को मीन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य के मीन राशि में एक माह के लिए विराजित होने के साथ ही खरमास शुरू हो ज ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 14 Mar 2026 05:47:05 AM (IST)Updated Date: Sat, 14 Mar 2026 05:47:04 AM (IST)
भगवान सूर्य के मीन राशि में गोचर करते ही शुरू होगा खरमासनईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भगवान सूर्य देव 14 मार्च शनिवार की मध्य रात्रि को मीन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य के मीन राशि में एक माह के लिए विराजित होने के साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा। सूर्य के मीन व धनु राशि में प्रवेश करने से खरमास लगता है। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर एक माह के लिए विराम लग जाता है। 15 अप्रैल से एक बार फिर मैरिज गार्डनों व रिसोर्ट में सन्नाटा पसर जाएगा।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि को खरमास के नाम से जाना जाता है। खरमास एक अशुभ महीना है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नही होते हैं। दूसरा खरमास 14 मार्च मध्यरात्रि एक बजकर चार मिनट बजे से प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान विवाह आदि मांगलिक कार्यो पर रोक लग जाएगी। इसके पश्चात 20 अप्रैल से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे, जो सात जुलाई तक लगातार चलेंगे।
खरमास में इसलिए नहीं करते हैं कोई शुभ काम
खरमास के समय में ग्रहों के राजा सूर्य देव की गति धीमी हो जाती है। वे हर साल जब देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में आते हैं, तो उनकी गति धीमी हो जाती है। शुभ कार्यों के लिए सूर्य का उच्च स्थिति में होना आवश्यक है। इस वजह से शुभ कार्य जैसे विवाह, ग्रह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ, नामकरण जैसे संस्कार आदि भी वर्जित हैं।
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खरमास में शुभ काम क्यों नहीं किए जाते हैं?
इस समय ग्रहों की शुभ दृष्टि प्रभावी नहीं रहती और ग्रह दशा में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे नए कार्यों के फल कम हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र बताता है कि जब ग्रह ऊर्जा स्थिर या मंद अवस्था में होती है, तब आरंभ किए गए शुभ कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं देते। इसलिए इस अवधि में सभी मांगलिक कार्य स्थगित रखने की सलाह दी गई है।