भद्रा के साये में आखिर कब होगा होलिका का पूजन व दहन, जानें शुभ समय
सोमवार को होली पर प्रदोषकाल में भद्रा और मंगलवार को चंद्र ग्रहण रहेगा। विद्वत परिषद के अनुसार होलिका पूजन शाम 5:30 बजे तथा दहन 5:47 बजे से पहले करना श ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 02 Mar 2026 01:57:52 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Mar 2026 01:57:52 PM (IST)
होली पर होलिका के पूजन व दहन को लेकर संशय। (फाइल फोटो)HighLights
- सोमवार प्रदोषकाल में लगेगी भद्रा
- मंगलवार को रहेगा चंद्र ग्रहण
- पूजन श्रेष्ठ समय शाम 5:30
धर्म डेस्क। इस बार होली पर सोमवार को प्रदोषकाल में भद्रा तथा अगले दिन मंगलवार को चंद्र ग्रहण रहेगा। भद्रा व ग्रहण के साए में आई होली पर होलिका के पूजन व दहन को लेकर संशय की स्थित बनी हुई है। आमजन समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उन्हें कब होलिका का पूजन व दहन करना है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त कब है
- श्री महाकालेश्वर विद्वत परिषद ने शास्त्र समस्त जानकारी दी है। परिषद के अनुसार सोमवार को शाम 5.30 बजे होलिका के पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय है। इसके बाद भद्रा का स्पर्श हो जाएगा। होलिका दहन के लिए शाम 5 बजकर 47 मिनट का समय निर्दोष है।
धर्मशास्त्र की मान्यता के अनुसार होलिका पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय प्रदोष काल का है। 2 मार्च को होली पर प्रदोष काल में 5 बजकर 55 मिनट से भद्रा लग जाएगी। शास्त्रीय मान्यता में भद्रा के दौरान पूजा पाठ नहीं की जाती है। इसलिए सोमवार को होली पूजन के लिए शाम को 5 बजाकर 30 मिनट का समय सबसे सर्वश्रेष्ठ है।
इसी प्रकार होलिका दहन के लिए सबसे उपयुक्त समय भद्रा शुरू होने से पहले 5.47 बजे तक ही रहेगा। हालांकि कुछ विद्वान शास्त्र की बारीकियों के आधार पर होलिका के दहन का समय मध्य रात्रि तक बता रहे हैं। क्यों मनाया जाता है होलिका दहन
दैत्यराज हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था। वह चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था।
हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए। अंत में उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गया। होलिका जलकर भस्म हो गई। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व फाल्गुन पूर्णिमा की रात मनाया जाता है।