मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव (ईसर जी) और माता पार्वती (गौरा जी) की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर और विवाहित स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
गणगौर पूजा 2026 - शुभ मुहूर्त (Muhurat)
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ज्योतिष गणना के अनुसार, इस वर्ष तृतीया तिथि का समय इस प्रकार है-
तृतीया तिथि प्रारंभ - 21 मार्च 2026, देर रात 02:30 बजे से।
तृतीया तिथि समापन - 21 मार्च 2026, रात 11:56 बजे तक।
उदयातिथि के अनुसार, गणगौर का मुख्य पर्व 21 मार्च (शनिवार) को मनाया जाएगा।
राशि अनुसार मंत्र जप (Rashi Anusar Mantra)
गणगौर पूजा के दिन अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यहां देखें अपनी राशि का विशेष मंत्र-
गणगौर पूजा 2026 - राशि अनुसार मंत्र (Rashi Anusar Mantra)
मेष राशि - ॐ ब्रह्म स्वरूपिण्यै नमः
वृषभ राशि - ॐ रामायै नमः
मिथुन राशि - ॐ नारायण्यै नमः
कर्क राशि - ॐ यौवनायै नमः
सिंह राशि - ॐ नित्यायै नमः
कन्या राशि - ॐ मधु प्रियायै नमः
तुला राशि - ॐ करुणायै नमः
वृश्चिक राशि -ॐ कामाक्ष्यै नमः
धनु राशि - ॐ वरदायै नमः
मकर राशि - ॐ अम्बायै नमः
कुंभ राशि - ॐ मुक्तायै नमः
मीन राशि - ॐ वर मंत्रायै नमः
पूजा और मंत्र जप के नियम
विशेष लाभ के लिए भक्तों को मंत्र जप के दौरान इन बातों का पालन करना चाहिए-
- पूजा से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा के सम्मुख बैठकर एकाग्र मन से ध्यान करें।
- मंत्र जप के लिए सुबह का समय या संध्या काल (प्रदोष काल) सबसे उत्तम माना जाता है।
- जप के दौरान मन में सकारात्मक विचार रखें और किसी के प्रति द्वेष न लाएं।
गणगौर का व्रत चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन पड़ता है, जो शक्ति और भक्ति के मिलन का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं मिट्टी के ईसर-गौरा बनाकर उन्हें सजाती हैं और पारंपरिक गीतों के साथ उनकी विदाई करती हैं।