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Hariyali Teej 2026: मनचाहा वर और पति की लंबी उम्र के लिए रखें यह व्रत, जानें क्या है पूजा की सही विधि?

15 अगस्त 2026 को मनाए जाने वाले हरियाली तीज पर्व पर सुहागिनें पति की लंबी उम्र के लिए सोलह श्रृंगार कर निर्जला व्रत और शिव-पार्वती की पूजन करेंगी।

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 12:02:04 PM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 12:24:11 PM (IST)
Hariyali Teej 2026: मनचाहा वर और पति की लंबी उम्र के लिए रखें यह व्रत, जानें क्या है पूजा की सही विधि?
हरियाली तीज के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 2026 में हरियाली तीज का पावन पर्व शनिवार, 15 अगस्त को मनाया जाएगा
  2. इसी दिन माता पार्वती की कठोर तप को भगवान शिव ने स्वीकार किया था

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के सबसे सुंदर और आध्यात्मिक त्योहारों में से एक 'हरियाली तीज' भगवान शिव और माता पार्वती के का पावन उत्सव माना जाता है। यह पर्व अखंड सौभाग्य, प्रेम, त्याग और प्रकृति की हरियाली का प्रतीक है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य के लिए…और कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

हरियाली तीज 2026, तिथि एवं शुभ मुहूर्त

  • वर्ष 2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त को मनाई जाएगी।
  • तृतीया तिथि प्रारंभ: 14 अगस्त 2026, शाम 6:47 बजे से
  • तृतीया तिथि समाप्त: 15 अगस्त 2026, शाम 5:29 बजे तक
  • पूजा का सर्वोत्तम समय: प्रदोष काल (सायंकाल) में शिव-पार्वती की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ही भगवान शिव ने माता पार्वती के समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से यह पर्व महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान देने वाला माना जाता है।


पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

  • प्रतिमा व वस्त्र: शिव-पार्वती और श्री गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, हरी साड़ी।
  • सोलह शृंगार: हरी चूड़ियाँ, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर, आलता, कुमकुम व अन्य शृंगार सामग्री।
  • पत्र-पुष्प व फल: केला के पत्ते, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, ताजे फूल व फल।
  • पूजन सामग्री: रोली, अक्षत, चंदन, मौली, हल्दी, धूप, घी का दीपक, कपूर, नारियल, सुपारी, दक्षिणा और मिठाई।
  • पंचामृत: गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर।
  • स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि
  • स्नान व शृंगार: प्रातःकाल स्नान कर हरे वस्त्र धारण करें और सोलह शृंगार करें।
  • चौकी स्थापना: पूजा स्थल को स्वच्छ कर लकड़ी की चौकी पर शिव-पार्वती और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • प्रथम पूज्य गणेश जी: सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण कर पूजन शुरू करें।
  • शृंगार व अर्पण: माता पार्वती को सोलह शृंगार की सामग्री अर्पित करें और भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र व जल चढ़ाएं।
  • भोग व आरती: पंचामृत, फल और मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर हरियाली तीज की कथा सुनें और अंत में आरती कर सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करें।

व्रत के प्रमुख नियम

  • यह व्रत मुख्य रूप से निर्जला (बिना जल और अन्न के) रखा जाता है। हालांकि, अस्वस्थ या गर्भवती महिलाएं फलाहार कर सकती हैं।
  • व्रत के दौरान दिन में सोना, क्रोध करना या कटु वचन बोलना वर्जित है।
  • इस दिन मेहंदी लगाना, हरे वस्त्र व चूड़ियां पहनना, झूला झूलना और लोकगीत गाना परंपरा का खास हिस्सा है।
  • अगले दिन सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में पारण कर व्रत खोलें।

हरियाली तीज की पावन व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की। इस जन्म में उनके पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। परंतु, माता पार्वती शिव जी को अपना पति मान चुकी थीं। वे अपनी सखी की मदद से घने जंगल में चली गईं और वहां बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर निर्जल तप करने लगीं। उनकी इस अटूट भक्ति, समर्पण और कठोर साधना से प्रसन्न होकर श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। तभी से यह दिन 'हरियाली तीज' के रूप में मनाया जाता है।

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