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पुरी की तरह अहिल्या की नगरी इंदौर में भी हर ओर गूंजा व्यंकट रमणा गोविंदा का जयघोष

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर सकल मनोरथ पूर्ण करने वाले भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में लाखों लोग शामिल हुए वहीं अहिल्या की नगरी में भी गुरुवार क...और पढ़ें

By ramkrashna MuleEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Fri, 17 Jul 2026 11:48:34 AM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2026 11:48:34 AM (IST)
पुरी की तरह अहिल्या की नगरी इंदौर में भी हर ओर गूंजा व्यंकट रमणा गोविंदा का जयघोष
रथयात्रा में उमड़ा जनसैलाब। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. गूंजते जयघोष के बीच फूलों से सजे रथ पर जगत को दर्शन देने निकले पालनहार
  2. तीन तरह के पापों से मुक्ति के लिए भक्तों ने की खीचा भगवान के रथ की डोर
  3. 6 किलोमीटर लंब मार्ग पर वेंकट रमणा गोविंदा के जयघोष गूंजे

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर सकल मनोरथ पूर्ण करने वाले भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में लाखों लोग शामिल हुए वहीं अहिल्या की नगरी में भी गुरुवार को सांझ ढलते ही व्यंकट रमणा गोविंदा के जयघोष गूंज उठे।

अवसर था मोगरे के फूलों से सजे रथ पर जगत के पालनहार भगवान वेंकटेश का श्रीदेवी और भूदेवी के संग कुभकोणम से आई परिधान में सज-धजकर भक्तों को दर्शन देने का। तीन तरह के पापों के नाश का भाव लिए हजारों श्रद्धालुओं ने रथ की डोर श्रद्धा और विश्वास खीच रहे थे। प्रभु के शृंगारित दर्शन के लिए मार्ग के दोनों ओर आराध्य के एक झलक के लिए श्रद्धालुओं कतारे लगी हुई थी।


उत्साह और उल्लास का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि यात्रा का हिस्सा नृसिंह बाजार में प्रवेश कर रहा था तो दूसरा गौराकुंड पर था। पावन सिद्धधाम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान, छत्रीबाग से गुरुवार को पारंपरिक रथयात्रा धार्मिक उल्लास के साथ निकली। रथयात्रा की शुरुआत नागोरिया पीठाधिपति विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज ने पूजा अर्चना के साथ ही। रंगारंग कलर शाट और फायर शो के बीच रथ का दृश्य देखते ही बन रहा था।

  • तीन तरह के पापों से मुक्ति के लिए भक्तों ने की खीचा भगवान के रथ की डोर
  • 6 किलोमीटर लंब मार्ग पर वेंकट रमणा गोविंदा के जयघोष गूंजे
  • 7 घंटे तक प्रभु के भक्ति का उल्लास पश्चिम क्षेत्र में नजर आया।
  • 5 झांकियां भगवान के विभिन्न स्वरूप की थी।
  • 250 मंचों से रथ पर विराजे वेंकटेश प्रभु पर पुष्प वर्षा हुई।
  • 300 से अधिक समाज- संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
  • 100 भक्त और स्वयं सेवक ने व्यवस्थाए संभाली।

पुरी के तर्ज पर बने नंदीघोष रथ पर विराजे तिरुपति बालाजी ने दिए भक्तों को दर्शन

शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित गुमाश्ता नगर स्थित तिरूपति बालाजी वेंकटेश मंदिर में गुरुवार को रथयात्रा महोत्सव श्रद्धा, उल्लास और प्रभु समर्पण के भाव देखते ही बन रहा था। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भगवान के मनोहारी स्वरूप को निहारने के लिए कतारे लगी थी।

जैसे ही पालकी में शृंगारित स्वरूप में भगवान बालाजी के श्रीदेवी और भूदेवी संग उत्सव विग्रहों के दर्शन हुए गोविंदा-गोविंदा के जयघोष गूंज उठे। भजनों की मधुर स्वर लहरियों के बीच भगवान बालाजी के मनोहारी दर्शन कर भक्त भाव-विभोर हो उठे।पहले श्रृंगारित पालकी में आराध्य को विराजित कर पूजा-अर्चना और महाआरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पालकी को अपने कंधों पर उठाकर मंदिर परिसर की परिक्रमा कराई।

यात्रा के दौरान श्री गुरु परंपरा पाठ, श्री वेंकटेश स्तोत्र, जगन्नाथ अष्टकम, श्री कनकधारा स्तोत्र सहित विभिन्न वैदिक स्तोत्रों का सामूहिक पाठ किया गया। ट्रस्ट के पुरुषोत्म पसारी, लक्ष्मण पटवा एवं मीडिया प्रभारी राम मूंदड़ा ने बताया कि इस वर्ष विशेष मंदिर में रखे गए जगन्नाथपुरी की रथयात्रा की तर्ज पर तैयार किया गया नंदीघोष रथ रहा।इससे इस पर विराजित भगवान के भक्तों को दर्शन का अवसर भी मिला।

इस अवसर पर बालकृष्ण भलिका, कृष्ण झंवर, व्यंकट लाहोटी, ओमप्रकाश पसारी, विजय बांगड़, गोपाल न्याती, बाबू झंवर, इश्वर बाहेती, रजत बेडिया आदि मौजूद थे।

पद्मावती वेंकटेश देवस्थान शृंगारित रथ पर विराजे भगवान

पद्मावती वेंकटेश देवस्थान विद्या पैलेस कॉलोनी में भगवान वेंकटेश बालाजी की रथ यात्रा मंदिर परिसर में निकाली गई। स्वामी केशवाचार्य महाराज, बालक स्वामी की प्रेरणा से निकाली गई यात्रा में अयोध्या से पधारे संत अन्नताचार्य शामिल हुए।मंदिर समिति के मनोहर सोनी, भगवानदास हेड़ा एवं नितिन तापड़िया ने बताया कि सुबह पुरुष सूक्त, आलविंदार स्तोत्र पाठ एवं श्री सूक्त के पाठ से अभिषेक हुआ। भजन गायक हरिकिशन साबू भजनों की प्रस्तुति दे रहे थे। रथ ने मंदिर परिसर में तीन परिक्रमा लगाई। इस अवसर पर गिरीश कश्यप, कैलाश जोशी, लाला साबू, सरला हेड़ा, पदमा सोनी आदि उपस्थित थे।

ब्रह्मोत्सव के सातवे दिन लक्ष्मी-वेंकटेश देवस्थान से निकली रथ यात्रा में भगवान भगवान जगन्नाथ की झांकी, कमल पुष्प पर विराजमान शेषावतार रामानुज स्वामी एवं गो संरक्षण का संदेश देती झांकियां विशेष आकर्षण रहीं। नासिक से आए 80 कलाकारों के बैंड की प्रस्तुति एवं भजन मंडलियों की प्रस्तुतियों पर महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मार्ग में व्हाटस ग्रुप और वाकी टाकी के माध्यम में भक्त मंडल के सदस्य एवं स्वयंसेवकों व्यवस्था संभाल रहे थे। रथयात्रा छत्रीबाग से प्रारंभ होकर नरसिंह बाज़ार , सीतलामाता बाज़ार, गोराकुण्ड चौराहा, शक्कर बाज़ार, बड़ा सराफा, पीपली बाज़ार, बर्तन बाजार, बजाजखाना, साठा बाजार से होते हुए पुनः मदिर में आई।प्रचार तोतला पंकज तोतला ने बताया कि महोत्सव का समापन 17 जुलाई को सुबह 9 बजे रजत कलशों से भगवान के शांति अभिषेक एवं माखन सेवा के साथ होगा।इस अवसर पर ट्रस्ट कमेटी के रविंद्र धूत, सुमित मंत्री, प्रकाश फोफलिया, कैलाश मूंदड़ा, अशोक डागा, अधिवक्ता महेश लाठी आदि मौजूद थे।

इंदौर में पुरी जैसी भव्यता... 16 जुलाई को चार प्रमुख मंदिरों से निकलेगी भगवान वेंकटेश की महा-रथयात्रा