कामिका एकादशी आज: ग्वालियर के मंदिरों में ठाकुरजी का होगा दिव्य श्रृंगार, जानें शुभ मुहूर्त और कथा
Kamika Ekadashi Gwalior: व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) 10 अगस्त की सुबह पांच बजकर 47 मिनट से आठ बजे के बीच किया जाएगा, जबकि कुछ वैष्णव सोमवार को कामिका ए...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 10:06:39 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 10:07:07 AM (IST)
गिर्राजी मंदिर का सोशल मीडिया से लिया गया फोटो।HighLights
- सनातन धर्म व गिर्राज मंदिर में विशेष पूजा
- ठाकुरजी को अर्पित होगा फलाहारी भोग
- कामिका एकादशी व्रत से मिटते हैं महापाप
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। कामिका एकादशी का व्रत नौ अगस्त (रविवार) को रखा जाएगा। सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आठ अगस्त को दोपहर एक बजकर 59 बजे शुरू होगी और नौ अगस्त को सुबह 11 बजकर चार मिनट पर समाप्त होगी। व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) 10 अगस्त की सुबह पांच बजकर 47 मिनट से आठ बजे के बीच किया जाएगा, जबकि कुछ वैष्णव सोमवार को कामिका एकादशी का व्रत करेंगे।
सनातन धर्म मंदिर व श्री गिर्राज मंदिर में एकादशी नौ अगस्त को मनाई जाएगी। मंदिर में ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार होगा और फलहारी भोग अर्पित किया जायेगा। व्रतधारी के साथ अन्य सनातनी दान-पुण्य करेंगे।
कथा का सार
धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और उसका क्या महत्व है? तब श्री कृष्ण ने कहा—हे युधिष्ठिर! प्राचीनकाल में एक नगर में एक प्रतापी और बलवान ठाकुर जमींदार रहता था। किसी बात पर उसकी एक ब्राह्मण से कहासुनी हो गई, जो गुस्से में हाथापाई और ब्रह्म हत्या (ब्राह्मण की मृत्यु) के महापाप में बदल गई।
ठाकुर ने संतों के कहे अनुसार पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ कामिका एकादशी का व्रत किया। उसने रात्रि में भगवान विष्णु के सामने दीपदान किया और तुलसी दल अर्पित किया।
व्रत के प्रभाव से भगवान श्री हरि विष्णु ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि उसके ब्रह्म हत्या जैसे सभी पाप नष्ट हो गए हैं। इस प्रकार व्रत का पालन करने से अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।