
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित श्रीलक्ष्मी-वेंकटेश देवस्थान पर बुधवार शाम वेंकट रमणा गोविंदा का जयघोष सैकड़ों कतार में लगे श्रद्धालु लगा रहे थे। अवसर था ब्रह्मोत्सव के छठे दिन आयोजित बहुप्रतीक्षित पुष्प बंगल दर्शन का। इसमें आकाश गंगा में चंद्रमा पर शंक, चक्र, गदा धारण कर मनोहारी स्वरूप में भगवान वेंकटेश विराजे थे।
डायमंड, जरदोशी से हस्त निर्मित रेशमी वस्त्र में प्रभु का मनभावन रूप देखकर भावुक भक्त जय-जयकार लगा रहे थे। उनकी विशेष पोशाक तमिलनाडु के कुंभकोणम से तैयार करवाई गई थी। साथ में माता महालक्ष्मी गजराज पर सुशोभित थीं।
शाम को जैसे ही महाआरती के बाद पट खुले भगवान के स्वरूप को देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।पुष्प बंगले का कोना-कोना रंग-बिरंगे फूलों से सुसज्जित किया गया था। इसमें मोगरा, जूही, कुंद, जरबेरा, गुलाब और अन्य सुगंधित पुष्पों से झरोखे निर्मित किए गए थे।
पिछले छह माह की योजना 20 दिनों दक्षिण भारत और बेंगलुरु से आए लगभग 50 विशेषज्ञों की टीम ने साकार किया। पुष्पों से निर्मित शंख, चक्र, तिलक, जय-विजय द्वार और हंस की मनोहारी आकृतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। सजावट में नागुनेरी, वृंदावन और जयपुर से लाए गए फूलों का प्रयोग किया गथा।
इस अवसर पर जगद्गुरु रामानुजाचार्य नागोरिया पीठाधिपति स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज सहित संत विद्वान उपस्थित थे। शाम को जोधपुर से पधारे गोवत्स राधाकृष्ण महाराज ने “सांवरिया है सेठ”, “सांवरे आजा रे” और “एकली खड़ी रे मीराबाई” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी।
इसके पूर्व सुबह प्रणय कलह लीला में भगवान रंगनाथ तथा श्रीदेवी-भूदेवी के प्रेम और मान-मनुहार के प्रसंगों का मंचन हुआ। रंग, गुलाल, अबीर और माखन की छटा के बीच भक्त प्रभु की प्रेमरस भक्ति में सराबोर हो गए। देवस्थान के प्रचार प्रमुख पंकज तोतला ने बताया कि इस अवसर पर विनोद अग्रवाल, विष्णु बिंदल, सत्यनारायण शर्मा, रमेश चितलांगया, पुखराज सोनी, महेंद्र नीमा, रविंद्र धूत, दिनेश गुप्ता और भरत तोतला आदि उपस्थित थे।