
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शिव और शक्ति के मिलन का पर्व महाशिवरात्रि 15 फरवरी को हर्षोल्लास से मनाई जाएगी। इस अवसर पर साधना में सिद्धि देने वाले सर्वार्थसिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र में चार प्रहर शिव आराधना होगी। पर्व की तैयारियां शहर के प्राचीन और नवीन शिव मंदिरों में शुरू होंगी। इस अवसर पर जहां महादेव की बारात, शोभायात्राएं निकलेंगी वहीं अलग-अलग स्वरूप में झांकियां भी सजाई जाएंगी। शिवालयों के प्रमुखों के अनुसार इस वर्ष महापर्व पर भगवान के शृंगार में कई नवाचार नजर आएंगे।
ज्योतिर्विद् विनायक तिवारी के अनुसार फाल्गुन माह की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी 15 फरवरी रविवार के दिन शाम 5 बजकर 4 मिनट से लेकर 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इस अवसर पर साधना में सफलता देने वाले सर्वार्थसिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र का मंगलकारी संयोग रहेगा। महाशिवरात्रि में रात्रि की प्रधानता होती है। इसके चलते पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा।
इसके चलते निशिथकाल पूजा रात 12 बजकर 09 मिनट से 1 बजकर 1 मिनट तक (51 मिनट) होगी। इसके अतिरिक्त रात्रि के चार प्रहर की पूजा का समय इस प्रकार है...
ज्योतिर्विद् शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार रात्रि के चार प्रहर होते हैं और हर प्रहर में शिव पूजा की जा सकती है। मध्यकाल के निशिथ काल के समय का भी विशेष महत्व है। यह वह समय है जब भगवान शिव अपने लिंग रूप में धरती पर अवतरित हुए थे। शिवरात्रि के एक दिन पहले, मतलब त्रयोदशी तिथि के दिन भक्तों को केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन सुबह नित्य कर्म करने के पश्चात् भक्त गणों को पूरे दिन के व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर नौलखा स्थित मनकामेश्वर कांटाफोड़ मंदिर पर पांच दिनी शिव विवाह उत्सव का आयोजन होगा। इसी तरह परदेशीपुरा स्थित शिवधाम में भी विवाह उत्सव का आयोजन होगा। इस मौके पर महादेव को दूल्हे और माता पार्वती को दुल्हन की तरह शृंगार किया जाएगा। इस कड़ी में प्राचीन बाणेश्वर महादेव मंदिर बाणगंगा पर भी बाबा का आकर्षक शृंगार और रुद्राक्ष वितरण होगा।
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