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सावन 2026: अगस्त 3 को सावन का पहला सोमवार, जानें पूजा के 4 शुभ मुहूर्त और सही पूजन विधि

सावन 2026 का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। इस दिन सुकर्मा योग के शुभ संयोग में पंचामृत स्नान और प्रदोष काल में शिव पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 31 Jul 2026 03:10:16 PM (IST)Updated Date: Fri, 31 Jul 2026 03:10:16 PM (IST)
सावन 2026: अगस्त 3 को सावन का पहला सोमवार, जानें पूजा के 4 शुभ मुहूर्त और सही पूजन विधि

HighLights

  1. सावन 2026 का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को होने वाला है
  2. इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का दुर्लभ संयोग है
  3. इस दिन महादेव की पूजा के लिए 4 प्रमुख शुभ मुहूर्त रहेंगे

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शुभ योगों के अद्भुत संयोग के साथ पवित्र सावन की शुरुआत हो चुकी है। भगवान शिव के भक्तों के लिए पूरा महीना बेहद खास रहता है और इसकी रौनक अगस्त तक बनी रहेगी। सावन के दौरान भक्तों को शिवरात्रि और सोमवार व्रत जैसे पावन अवसर मिलेंगे। मान्यता है कि सावन सोमवार को विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती प्रसन्न होकर अखंड सौभाग्य, सुख-शांति और स्थिरता का आशीर्वाद देते हैं। आइए जानते हैं सावन के पहले सोमवार की तारीख, इसके शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि-

सावन का पहला सोमवार कब है?

पंचांग के अनुसार, सावन माह का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को पड़ेगा। शुभ संयोग के मुताबिक, इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसका महत्व काफी बड़ा माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सुकर्मा योग को बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस योग में किए गए सभी धार्मिक और शुभ कार्य बिना किसी बाधा के सफल होते हैं। इसलिए यह दिन शिव आराधना, रुद्राभिषेक और व्रत के लिए बेहद खास है।


पूजा के 4 सबसे शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 06:26 बजे से 07:56 बजे तक (यह समय शिव पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है)
  • निशिता काल: रात 11:33 बजे से 12:21 बजे तक (रात्रि में शिव ध्यान के लिए विशेष फलदायी)

सावन सोमवार की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि

  • स्नान और वस्त्र: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद या हल्के रंग के साफ वस्त्र धारण करें।
  • जलाभिषेक: सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें।
  • पंचामृत स्नान: इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल को मिलाकर तैयार किए गए पंचामृत से महादेव का अभिषेक करें। पंचामृत के बाद एक बार फिर साफ जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।
  • बेलपत्र व श्रृंगार: शिवलिंग पर 11 या 21 अखंडित (बिना कटे-फटे) बेलपत्र चढ़ाएं।
  • माता पार्वती और गणेश पूजा: माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाकर पूरे शिव परिवार की पूजा करें।
  • मंत्र जाप व आरती: फूल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। अंत में शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर महादेव की आरती करें।