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15 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग में साल की पहली सोमवती अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त और दान का महत्व

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर प्रारंभ होगी और 15 जून को सुबह आठ बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी।

By Jogendra SenEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 12:37:15 PM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 12:37:59 PM (IST)
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15 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग में साल की पहली सोमवती अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त और दान का महत्व
एआई से बना चित्र।

HighLights

  1. भगवान विष्णु के साथ देवाधिदेव महादेव की होगी आराधना
  2. अखंड सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि के लिए सुहागिनें करेंगी विशेष पूजा
  3. अधिकमास की अमावस्या पर सत्तू, जल और वस्त्र दान का है विशेष महत्व

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ज्येष्ठ अधिकमास में आने वाली इस वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या 15 जून सोमवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि सुख-सौभाग्य, पितृ दोष से मुक्ति, पारिवारिक समृद्धि और अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाली मानी जाती है। अधिकमास में पड़ने के कारण इस बार की सोमवती अमावस्या का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। सोमवती अमावस्या के दूसरे दिन प्रतिपदा से पुरुषोत्तम मास की समाप्ति हो जाएगी। मल मास की समाप्ति के साथ विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। सोमवती अमावस्या को मां तुलसी की परिक्रमा का विशेष महत्व है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इस माह की अमावस्या पर किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन पति-पत्नी मिलकर शिव-शक्ति की उपासना करें तो वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।


महिलाएं देंगी मां तुलसी की परिक्रमा: सोमवती अमावस्या मां तुलसी की 108 परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती है। सुहागिन महिलाएं सुहाग के प्रतीक चिह्नों, जैसे चूड़ी, महावर, मेहंदी, सिंदूर 108 नग से परिक्रमा कर सास, जिठानी, ननद व विप्र महिला को दान करती हैं।

इन वस्तुओं का दान का महत्व

अमावस्या पर पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन जल से भरा मटका, सत्तू, फल, अन्न, सूती वस्त्र, छाता, हाथ का पंखा तथा जूते-चप्पल का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। भीषण गर्मी को देखते हुए जरूरतमंदों को जल उपलब्ध कराना या सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगवाना भी श्रेष्ठ दान माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे दान से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

सोमवती अमावस्या को बन रहे हैं शुभ संयोग

इस वर्ष सोमवती अमावस्या पर कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण सुबह पांच बजकर 23 मिनट से सात बजकर आठ मिनट तक रहेगा। इन शुभ योगों में किए गए मंत्र जाप, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही इसी दिन सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे मिथुन संक्रांति का विशेष संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस त्रिगुणी संयोग को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है।

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर प्रारंभ होगी और 15 जून को सुबह आठ बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर सोमवती अमावस्या का पर्व 15 जून को मनाया जाएगा। स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह चार बजकर तीन मिनिट से चार बजकर 43 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 12:15 बजे तक तथा अमृत काल सुबह 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।