
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : नेमावर रोड के मुख्य मार्ग पर स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एक प्राचीन मंदिर है।रास्ते मे खेत, हरियाली मन को प्रफुल्लित कर देते हैं ।
मंदिर परिसर मध्यम आकार का होने पर भी अलौकिक आराधना स्थल है। मान्यता है कि मांगलिक, वैवाहिक कार्यक्रम के पूर्व सिद्धेश्वर मंदिर में दर्शन करने से कार्य निर्विघ्न संपन्न होते है । महाशिवरात्रि, सावन -भादो के महीनों मे यहां पूजा अर्चना का विशेष महत्व है।
इसका इतिहास लगभग डेढ़ शताब्दी पूर्व का है। ब्रिटिश शासनकाल में भी यह स्थान शिव भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र रहा है। जीर्ण शीर्ण हो चुके स्थान को संवारने के लिए यहां पहुंच मार्ग बनवाया। इसके साथ ही मंदिर के टूट फुट वाली जगह सुधार कर रंग रोपण भी किया गया। इस आधार पर मंदिर के नवीन स्वरूप को भी अब पांच दशक से अधिक का समय हो चुका है।
मंदिर के सामने एक पृथक हिस्से मे देव महाराज का स्थान भी है। विशेष प्रयोजन व दिवस में दर्शन लाभ होता है। विशेषकर अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष पूजन देव महाराज का होता है। बीमार, अस्वस्थ लोगो को यहां श्रद्धापूर्वक मन्नत से जल्दी स्वास्थ्य लाभ मिलता है । देव महाराज स्थल पर बच्चो के मुंडन करवाने की भी एक परंपरा दशकों से चली आ रही है।
महादेव की शरण मे आए भक्तों को जन्म-मृत्यु के भय पीड़ा और दुख से मुक्ति मिलती है। आम, करोंदे जैसे ताजा फलो का प्रसाद मंदिर की खासियत है। ठंड के दिनों मे गुड बनाकर खोडी के स्थान पर एक बाल्टी के सांचे मे भोग लगाया जाता रहा। सुबह दर्शन और आरती का विशेष महत्व है। ये नई ऊर्जा प्रदान करता है। - पंडित हरिदेव जोशी
मैं दादाजी एवं पिताजी के समय से इस मंदिर का अनन्य भक्त हूं। भोलेनाथ की विशेष कृपा मेरे परिवार पर बनी हुई है। भक्तों की सुविधा के लिए हाल ही मे नया शेड भी लगवाया है और स्थान पक्का किया, ताकि भक्तों को धूप बारिश से असुविधा न हो। मेरे पुत्र और पौत्र, भतीजो भांजों का मुंडन संस्कार मंदिर पास ही स्थित देव महाराज स्थल पर हुआ था । -भक्त अरविंद जोशी
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