
स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच और पूर्व विश्व कप विजेता गौतम गंभीर अपनी पहचान (Identity) के गलत इस्तेमाल को लेकर बेहद सख्त नजर आ रहे हैं।
गंभीर ने उनके नाम, चेहरे और आवाज का उपयोग कर बनाए गए AI डीपफेक वीडियो और अनऑथराइज्ड मर्चेंडाइज के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा के लिए सिविल सूट दाखिल करते हुए 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।
यह मामला साल 2025 के अंत से जुड़ा है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गंभीर के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर कई फर्जी वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो में फेस-स्वैपिंग और वॉयस क्लोनिंग जैसी एडवांस AI तकनीक का सहारा लिया गया, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि गंभीर खुद वे बातें कह रहे हैं, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं।
कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, दो विशेष वीडियो ने गंभीर की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया।
फर्जी इस्तीफा - एक वीडियो में गंभीर को भारतीय टीम के हेड कोच पद से इस्तीफा देते दिखाया गया। इस क्लिप को करीब 20 लाख से ज्यादा व्यूज मिले, जिससे फैंस के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
खिलाड़ियों पर विवादित टिप्पणी - दूसरे वीडियो (17 लाख व्यूज) में AI के जरिए उन्हें सीनियर और दिग्गज खिलाड़ियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाया गया, जिससे क्रिकेट जगत में अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ।
गंभीर ने इस मामले में कुल 16 संस्थाओं और व्यक्तियों को पक्षकार बनाया है। इनमें शामिल हैं सोशल मीडिया अकाउंट्स, जो फर्जी कंटेंट फैला रहे थे।
ई-कॉमर्स दिग्गज - अमेजोन (Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) जैसी कंपनियां, जो बिना अनुमति उनके नाम का इस्तेमाल कर सामान बेच रही थीं।
टेक जायंट्स - Meta (Facebook/Instagram), X (Twitter) और Google को भी इसमें शामिल किया गया है ताकि कोर्ट के आदेशानुसार कंटेंट को हटाया जा सके।
गंभीर ने अपनी याचिका में कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क एक्ट 1999 और कमर्शियल कोर्ट एक्ट 2015 का हवाला देते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं।
उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे या आवाज के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। सभी प्लेटफॉर्म्स से फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत हटाया जाए। उनकी साख और प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना दिया जाए।
गौतम गंभीर का बयान, 'मेरी पहचान का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने और व्यावसायिक लाभ कमाने के लिए किया जा रहा है। यह केवल मेरी निजी प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि यह कानून, गरिमा और डिजिटल दौर में सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है'।