MPL 2026: रन वर्षा से पहले बूंदों से मुकाबला, बारिश ने मैदानकर्मियों के लिए बढ़ाई चुनौतियां
अब तक तेज गर्मी ने खिलाड़ियों की परीक्षा ली, लेकिन अब मैदान पर रन वर्षा से पहले बूंदों से मुकाबला हुआ। शनिवार को शहर में तेज वर्षा ने शहरवासियों को तो...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 12:50:54 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 12:50:54 PM (IST)
बारिश होने पर पूरे होलकर स्टेडियम को कवर से ढंक दिया गया। (नईदुनिया प्रतिनिधि)HighLights
- अब तक तेज गर्मी ने खिलाड़ियों की परीक्षा ली, लेकिन अब मैदान पर रन वर्षा से पहले बूंदों से मुकाबला हुआ
- शनिवार को शहर में तेज वर्षा से मैदानकर्मियों की चुनौतियां बढ़ गईं
- फिलहाल पूरे होलकर स्टेडियम को कवर्स से ढंक दिया गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश लीग अपने अंतिम पड़ाव की ओर है। अब तक तेज गर्मी ने खिलाड़ियों की परीक्षा ली, लेकिन अब मैदान पर रन वर्षा से पहले बूंदों से मुकाबला हुआ। शनिवार को शहर में तेज वर्षा ने शहरवासियों को तो भीषण गर्मी से राहत दिलाई, लेकिन मैदानकर्मियों की चुनौतियां बढ़ गईं। फिलहाल पूरे होलकर स्टेडियम को कवर्स से ढंक दिया गया है।
मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को बादल छाए रहेंगे। दोपहर बाद वर्षा होने की भी संभावना है। इससे रविवार को होने वाले मैचों पर असर पड़ेगा। रविवार को होलकर स्टेडियम में दो मैच होंगे। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग का मीडिया पार्टनर नईदुनिया है।
मध्य प्रदेश लीग टी-20 टूर्नामेंट का कार्यक्रम घोषित होने के बाद से ही वर्षा की संभावनाएं बनी हुई थीं। इंदौर में आमतौर पर 15 जून से मानसून की आमद हो जाती है, लेकिन इस बार मानसून कुछ दूर ठिठका हुआ है। इससे क्रिकेट की दावत तो मिली, लेकिन तेज गर्मी और उमस ने खिलाड़ियों के साथ प्रशंसकों के भी छक्के छुड़ाए।
शनिवार को अचानक मौसम का मन डोला और बादल छाने के साथ दोपहर को तेज वर्षा भी हुई। हालांकि ऐसे हालातों से मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन के मैदानकर्मी अभ्यस्त हैं और कुछ ही मिनटों में पूरा मैदान ढंक लिया गया।
एमपीसीए के मुख्य क्यूरेटर मनोहर जामले ने बताया कि पानी से निपटने के लिए हमारी तैयारियां पूरी हैं। हमें मौसम का अंदेशा पहले से था और हमने लीग प्रारंभ होने के साथ ही इसके लिए तैयारियां कर ली थीं।
वर्षा होने पर सबसे जरूरी काम होता है मैदान को कम समय में सही तरीके से ढंकना। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है वर्षा बंद होने के बाद कवर्स को मैदान से हटाना। कवर्स को दौड़कर ढंकना आसान होता है, लेकिन कवर्स हटाते समय यदि गलती हुई तो पानी मैदान पर बह सकता है। जिससे पूरी मेहनत खराब हो जाती है।
हमने लीग प्रारंभ होने के पहले 100 के करीब मैदानकर्मियों को नियुक्त किया था। इन्हें बकायदा ट्रेनिंग दी गई। इनमें से अधिकांश पहले भी मैचों के दौरान सेवाएं देते रहे हैं, जिससे उन्हें इस कार्य का अभ्यास है। इसके अलावा सभी संभागों के पिच क्यूरेटरों को भी बुलाया गया है। जिससे उन्हें भी ऐसी परिस्थितियों से अभ्यस्त होने का अवसर मिले।
अब आउटफील्ड होगा तेज
मनोहर जामले के अनुसार, लीग में लगातार दो मैच होलकर स्टेडियम में हो रहे हैं। शनिवार को आराम का दिन होने से हमने मैदान को आगामी मैचों के लिए तरोताजा कर लिया। एक सप्ताह में घास काफी बढ़ गई थी, जिससे आउटफील्ड कुछ धीमा हुआ था। अब घास की कटिंग कर दी गई है, जिससे रनों की रफ्तार भी बढ़ेगी। मैदान की सफाई भी की गई। मैचों के दौरान खिलाड़ियों के दौड़ने से जूतों के स्पाइक्स में उलझकर घास निकल जाती है। ऐसे क्षेत्र चिन्हित कर वहां मिट्टी डालकर समतलीकरण किया गया। अन्य जरूरी काम भी पूरे किए गए। दोपहर को पानी गिरने से कुछ कार्य प्रभावित हुए, लेकिन इससे खास फर्क नहीं पड़ेगा।